
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। कांग्रेस में वरिष्ठ नेताओं में खींचतान के बीच पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी एक मंच पर साथ नजर आएंगे। दोनों शनिवार को दतिया पहुंचेंगे। यहां उपचुनाव की घोषणा हो चुकी है। दोनों यहां संभावित उम्मीदवार को लेकर कार्यकर्ताओं की नब्ज टटोलने के लिए बैठक करेंगे।
संभावना जताई जा रही है कि पार्टी यहां सहानुभूति का लाभ उठाने के लिए पूर्व विधायक राजेंद्र भारती के बेटे अंकित पर दांव लगा सकती है। कांग्रेस ने चुनावी मोर्चा पर राज्यसभा सदस्य अशोक सिंह, पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह और ओबीसी कांग्रेस के अध्यक्ष सिद्धार्थ कुशवाह को लगाया है।
2023 के चुनाव में भाजपा के जो बड़े नेता पराजित हुए थे, उनमें दतिया से लड़े डा. नरोत्तम मिश्रा भी थे। यहां कांग्रेस ने काफी विरोध के बाद राजेंद्र भारती को प्रत्याशी बनाया था। दरअसल, तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष कमल नाथ ने भाजपा से आए अवधेश नायक का टिकट घोषित कर दिया था। नायक का क्षेत्र में प्रभाव भी है लेकिन भारती समर्थक अड़ गए। दतिया से लेकर भोपाल तक प्रदर्शन हुए और अंतत: पार्टी को प्रत्याशी बदलना पड़ा। इसमें नायक की भी सहमति थी लेकिन अब परिस्थिति बदल गई हैं।
राजेंद्र भारती अयोग्य घोषित हो चुके हैं और छह वर्ष तक चुनाव नहीं लड़ सकते हैं इसलिए नायक की दावेदारी का आधार है। हालांकि, भारती अपने पुत्र अंकित के लिए लाबिंग कर रहे हैं। पार्टी नेताओं का मानना है कि जिस तरह से बरसों पुराने मामले के चलते उनकी सदस्यता समाप्त हुई है, उससे लोगों में सहानुभूति भी है। इसे भुनाने के लिए बेटे पर दांव लगाया जा सकता है लेकिन यह तभी संभव होगा जब कार्यकर्ता सहमत हों।
यही जानने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी शनिवार को दतिया पहुंच रहे हैं। दोनों कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करके प्रत्याशी के नाम पर फीडबैक लेंगे। इसका एक मकसद कार्यकर्ताओं को एक संदेश यह भी देना है कि हम सब एक हैं। पार्टी में अंतर्कलह जैसी कोई बात नहीं है।
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सूत्रों का कहना है कि पार्टी सहमति के आधार पर उम्मीदवार तय करेगी। इसके लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने पहले ही राज्यसभा सदस्य अशोक सिंह, पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह और ओबीसी कांग्रेस के अध्यक्ष सिद्धार्थ कुशवाह की समिति बनाकर आकलन करवाया है।
यह टीम मैदानी मोर्चा भी संभालेगी और सर्वाधिक जोर उन क्षेत्रों पर रहेगा, जहां से कांग्रेस को बढ़त मिली थी। उन क्षेत्रों में महिला, युवा, अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के कार्यकर्ताओं की अलग-अलग टीम तैनात की जाएंगी।