• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • गणेशोत्‍सव 2026
  • हनुमान अंश
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • मानसून
  • वास्‍तु शास्‍त्र
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • भोपाल

MP विधानसभा की कार्यवाही से विलुप्त होती जा रही जनहित पर चर्चा, इस बार भी हंगामा, शोर-शराबे में गुम हो गए आम लोगों की समस्याओं से जुड़े मुद्दे

मध्य प्रदेश विधानसभा का एक और सत्र हंगामे व शोर-शराबे की भेंट चढ़ गया। यह मानसून सत्र कई मायनों में महत्वपूर्ण था, लेकिन दो दिन पहले ही बुधवार रात को ...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: manoj dubey
Publish Date: Thu, 23 Jul 2026 09:05:25 PM (IST)Updated Date: Thu, 23 Jul 2026 09:07:37 PM (IST)
MP विधानसभा की कार्यवाही से विलुप्त होती जा रही जनहित पर चर्चा, इस बार भी हंगामा, शोर-शराबे में गुम हो गए आम लोगों की समस्याओं से जुड़े मुद्दे

HighLights

  1. सदस्यों ने 1,756 प्रश्न लगाए थे
  2. 15 विधेयक प्रस्तुत किए गए
  3. यूसीसी से जुड़े पक्ष सामने नहीं आ सके

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा का एक और सत्र हंगामे व शोर-शराबे की भेंट चढ़ गया। यह मानसून सत्र कई मायनों में महत्वपूर्ण था, लेकिन दो दिन पहले ही बुधवार रात को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। इसमें समान नागरिक संहिता (यूसीसी), श्रम संहिता और फायर सेफ्टी जैसे आमजन से सीधे जुड़ाव वाले विधेयक प्रस्तुत किए गए मगर इन पर सार्थक चर्चा के स्थान पर हंगामा ही होता रहा है।

वहीं, प्रश्नकाल भी नहीं चला। ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर चर्चा भी रस्म अदायगी ही रही। कुल मिलाकर सदन में जनहित के मुद्दों पर चर्चा कम और राजनीति अधिक हुई।

सदस्यों ने 1,756 प्रश्न लगाए थे

विधानसभा का मानसून सत्र 20 से 24 जुलाई तक के लिए बुलाया गया था। इसके लिए सदस्यों ने 1,756 प्रश्न लगाए थे। 522 ध्यानाकर्षण, 29 स्थगन, 171 शून्यकाल और 21 अशासकीय संकल्प की सूचनाएं दी गईं। 210 याचिकाएं प्रस्तुत की गईं, जिन्हें संबंधित विभागों को भेजा जाएगा।


15 विधेयक प्रस्तुत किए गए

सरकार की ओर से प्रथम अनुपूरक बजट के लिए विनियोग सहित 15 विधेयक प्रस्तुत किए गए। इनके लिए वैसे तो पांच दिन की अवधि कम थी लेकिन समय का सदुपयोग किया जाता तो अधिकतर विषयों पर सारगर्भित चर्चा कराई जा सकती थी, लेकिन जैसा पिछले सत्रों में होता आया है, वैसा ही मानसून सत्र में भी हुआ।

यूसीसी से सभी प्रभावित होंगे। कई व्यवस्थाएं बदलेंगी। यदि सदन में इस पर चर्चा होती तो इसके सकारात्मक पक्ष सामने आते जो भ्रांतियों को दूर करते लेकिन राजनीतिक स्वार्थ के चलते जनहित के इतने महत्वपूर्ण विषय पर केवल शोर-शराबा होता रहा।

यूसीसी से जुड़े पक्ष सामने नहीं आ सके

कांग्रेस ने जिस ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण का विषय उठाकर हंगामा किया, वह भी निश्चित तौर पर महत्वपूर्ण है लेकिन यदि चर्चा करानी ही थी और मंशा बड़े वर्ग के हित संरक्षण की थी तो नियम-प्रक्रिया के तहत विषय लाया जा सकता था। मगर उद्देश्य केवल यूसीसी का विरोध करना था इसलिए ओबीसी कार्ड खेला गया। चूंकि, हंगामा चल रहा था इसलिए सत्तापक्ष की ओर से भी यूसीसी से जुड़े पक्ष सामने नहीं आ सके।

श्रम संहिता प्रविधान पर भी कोई चर्चा नहीं हुई

हंगामे के बीच मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने जरूर इसका सकारात्मक पक्ष रखने का प्रयास किया। उधर, श्रम संहिता के प्रविधान श्रमिक से लेकर कारोबारियों सबसे जुड़े हैं। कई बड़े बदलाव इसके माध्यम से किए गए हैं। 24 घंटे बाजार खोलने, रात की पाली में काम करने वालों के काम के घंटे की गणना दिन में काम करने वालों से अलग करने से लेकर तमाम प्रविधान हैं, जो बड़े वर्ग को प्रभावित करते हैं लेकिन इस पर भी कोई चर्चा नहीं हुई।

फायर सेफ्टी एक्ट को लेकर भी चर्चा नहीं

यही स्थिति फायर सेफ्टी एक्ट को लेकर रही। जबकि, इसे लेकर सदन में कई बार विषय उठाया जा चुका है। केवल एक किसानों से जुड़े विषय को लेकर दोनों पक्षों की ओर से गंभीरता दिखाई गई। पक्ष और प्रतिपक्ष की ओर से किसान हित में अपनी-अपनी बात रखी गई।

सार्थक चर्चा होती तो प्रदेश व जनहित में समाधान निकलता

आमजन की समस्याओं को प्रश्न और ध्यानाकर्षण के माध्यम उठाया जाता है लेकिन इन पर भी विधिवत चर्चा नहीं हो सकी। जबकि, किसान, युवा, महिला, कानून-व्यवस्था, अधोसंरचना विकास से जुड़े कई विषय थे जिन पर यदि सार्थक चर्चा होती तो प्रदेश व जनहित में समाधान निकलता।

विधानसभा के पूर्व प्रमुख सचिव भगवानदेव ईसराणी का कहना है कि यह स्थिति अच्छी नहीं कही जा सकती है। सदन में संवाद होना चाहिए न कि हंगामा।

यह भी पढ़ें- यूनिफॉर्म सिविल कोड के जरिए हिंदू, मुस्लिम और सभी धर्मों के लोगों पर एक जैसे कानून लागू होंगे, शादी, तलाक और विरासत से जुड़े मामले इसमें शामिलः सीएम यादव