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MP में आयुष्मान योजना का पेमेंट अटका, NABH से बढ़ा विवाद; भोपाल में डॉक्टरों का प्रदर्शन, मरीजों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें

डॉक्टरों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि 1 अक्टूबर को अस्पतालों के खिलाफ बड़े पैमाने पर डी-एम्पैनलमेंट की दंडात्मक कार्रवाई की जाती है, तो पूरे मध्य प्...और पढ़ें

By mukesh vishwakarmaEdited By: bhupendra Singh Rajput
Publish Date: Wed, 30 Sep 2026 05:08:40 PM (IST)Updated Date: Wed, 30 Sep 2026 05:20:13 PM (IST)
MP में आयुष्मान योजना का पेमेंट अटका, NABH से बढ़ा विवाद; भोपाल में डॉक्टरों का प्रदर्शन, मरीजों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें
जेपी अस्पताल में निजी डॉक्टर्स ने प्रदर्शन किया। नईदुनिया।।

HighLights

  1. 6 महीने से आयुष्मान का भुगतान नहीं मिलने पर आक्रोश
  2. भोपाल के जेपी अस्पताल में निजी अस्पतालों के डॉक्टरों का प्रदर्शन
  3. अस्पताल संगठनों ने कार्रवाई होने पर प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी

नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों का कैशलेस इलाज करने वाले निजी अस्पतालों के संचालकों का सब्र अब जवाब दे गया है। पिछले 5-6 महीनों से योजना के बकाये भुगतान और एनएबीएच ( नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स) की सख्त अनिवार्यता के विरोध में राजधानी भोपाल के डॉक्टर बुधवार को सड़कों पर उतर आए।

यूनाइटेड प्राइवेट हॉस्पिटल एसोसिएशन ( यूपीएचडीए) के बैनर तले डॉक्टरों ने जेपी अस्पताल परिसर स्थित आयुष्मान योजना के प्रदेश कार्यालय पहुंचकर जोरदार नारेबाजी की और धरना दिया।

6 महीने से अटका करोड़ों का भुगतान

प्रदर्शन में शामिल डॉक्टरों ने बताया कि भोपाल में करीब 468 निजी अस्पताल आयुष्मान योजना से संबद्ध हैं। प्रत्येक अस्पताल का योजना के तहत औसतन 1.5 से 2 करोड़ रुपये का भुगतान पिछले 5 से 6 महीनों से अटका हुआ है।


यूनाईटेड प्राइवेट हॉस्पिटल एसोसिएशन के उपाध्यक्ष डॉ. धनंजय मिश्रा ने बताया कि लंबा बकाया होने के कारण अस्पतालों के लिए दवाई वेंडरों, पैथोलॉजी और डॉक्टरों सहित कर्मचारियों का भुगतान करना मुश्किल हो गया है। उन्होंने मांग की कि अटकी हुई राशि का तुरंत भुगतान किया जाए।

1 अक्टूबर से डी-एम्पैनलमेंट की तलवार

प्रदर्शनकारियों ने आयुष्मान भारत योजना में लागू किए जा रहे कम्पलीट/एंट्री लेवल एनएबीएच (एनएबीएच) सर्टिफिकेशन की शर्त का भी तीखा विरोध किया। अस्पताल संगठनों को अंदेशा है कि स्वास्थ्य विभाग 1 अक्टूबर से भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जैसे बड़े शहरों में बिना एनएबीएच वाले कई छोटे एवं मध्यम अस्पतालों को आयुष्मान योजना से डी-एम्पैनल (सूची से बाहर) करने जा रहा है।

गरीब और मध्यमवर्गीय मरीजों का इलाज होगा प्रभावित

अस्पताल संचालकों ने स्पष्ट किया कि वे स्वास्थ्य गुणवत्ता के विरोधी नहीं हैं, लेकिन एनएबीएच मानकों को अनिवार्य करने के बजाय स्वैच्छिक और प्रोत्साहन आधारित बनाया जाना चाहिए।

यदि एक साथ दर्जनों छोटे-मध्यम अस्पताल आयुष्मान योजना से बाहर किए जाते हैं, तो इसका सीधा असर उन गरीब व मध्यमवर्गीय मरीजों पर पड़ेगा जो अपने घर के पास स्थित निजी अस्पतालों में इलाज कराते हैं। अचानक अस्पतालों के बाहर होने से सरकारी अस्पतालों पर भी मरीजों का अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा।

मांगें न मानने पर प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

हॉस्पिटल एसोसिएशन ने राज्य सरकार से इस पूरे मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक कर व्यावहारिक समाधान निकालने की मांग की है।

डॉक्टरों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि 1 अक्टूबर को अस्पतालों के खिलाफ बड़े पैमाने पर डी-एम्पैनलमेंट की दंडात्मक कार्रवाई की जाती है, तो पूरे मध्य प्रदेश में निजी अस्पताल सामूहिक रूप से हड़ताल और उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।