
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। मध्य प्रदेश से राज्यसभा सदस्य और केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री डा. एल. मुरुगन के अपने मंत्री पद और राज्यसभा की सदस्यता दोनों से इस्तीफा देने से राज्यसभा की एक सीट के लिए उपचुनाव होगा। मप्र में राज्यसभा की 11 सीटें हैं, जिनमें से दो कांग्रेस और आठ भाजपा के पास हैं।
इसी वर्ष जून में हुए उपचुनाव में तरुण चुग, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट राज्यसभा चुनाव में निर्विरोध निर्वाचित हुए थे। पार्टी सूत्रों का कहना है कि भाजपा उपचुनाव में किसी बाहरी नेता को मप्र से राज्यसभा भेज सकती है। इसे मोदी कैबिनेट में होने वाले संभावित विस्तार से जोड़कर देखा जा सकता है।
भाजपा सूत्रों का कहना है कि दीपावली से पहले मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का एक बड़ा फेरबदल संभावित माना जा रहा है। इस संभावित विस्तार में यदि किसी ऐसे बड़े राष्ट्रीय चेहरे या गैर-सांसद नेता को कैबिनेट मंत्री या राज्य मंत्री बनाया जाता है, जिसे संसद में लाना जरूरी हो, तो उसके लिए मध्य प्रदेश की यह सीट सबसे सुरक्षित और पक्की सीट मानी जा रही है, क्योंकि यहां भाजपा के पास एकतरफा बहुमत है।
मुरुगन से पहले भी भाजपा में राष्ट्रीय समीकरणों यानी राज्यों को साधने के लिए मध्य प्रदेश की सीटों का उपयोग बाहरी नेताओं के लिए होता रहा है। अतीत में प्रकाश जावड़ेकर (महाराष्ट्र), एम. वेंकैया नायडू (आंध्र प्रदेश)जैसे नेताओं को भी अलग-अलग समय पर यहां से प्रतिनिधित्व दिया गया है। इससे यह संभावना प्रबल है कि दक्षिण भारत से ही किसी नेता को मप्र से राज्यसभा भेजा जा सकता है।