ग्वालियर में उठी मांग, बदला पुराना फैसला
शुरुआती योजना के अनुसार सरकार की मंशा जबलपुर, भोपाल और उज्जैन में अलग-अलग यूनिवर्सिटी बनाने की थी। हालांकि, इसके बाद ग्वालियर अंचल से भी एक अलग मेडिकल यूनिवर्सिटी बनाने की मांग तेजी से उठी। इस क्षेत्रीय मांग को ध्यान में रखते हुए सरकार ने अपनी पुरानी योजना में संशोधन किया और अब पूरे प्रदेश के लिए कुल 2 यूनिवर्सिटी बनाने का नया ड्राफ्ट तैयार किया है।
इस नए विभाजन और नई प्रशासनिक व्यवस्था को लागू करने से राज्य सरकार की तिजोरी पर हर साल ₹10 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय भार आएगा।
2 यूनिवर्सिटी में शामिल होने वाले जिले: समझें पूरा भौगोलिक गणित
नए ड्राफ्ट के अनुसार मध्य प्रदेश के सभी जिलों को इन दो चिकित्सा विश्वविद्यालयों के बीच भौगोलिक आधार पर विभाजित किया गया है:
1. जबलपुर यूनिवर्सिटी (महाकौशल और विंध्य क्षेत्र)
इस यूनिवर्सिटी के अधीन मुख्य रूप से महाकौशल और विंध्य क्षेत्र के सभी मेडिकल कॉलेज संचालित होंगे। इसके दायरे में आने वाले प्रमुख जिले इस प्रकार हैं:
- जबलपुर, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली
- शहडोल, उमरिया, डिंडोरी, मंडला, बालाघाट
- सिवनी, छिंदवाड़ा, पन्ना और टीकमगढ़
- इनके अलावा आसपास के कई अन्य जिले भी इसी के क्षेत्राधिकार में रहेंगे।
2. उज्जैन यूनिवर्सिटी (मध्य, पश्चिमी मप्र और ग्वालियर-चंबल अंचल)
भोपाल समेत मध्य प्रदेश के मध्य, पश्चिमी और उत्तरी (ग्वालियर-चंबल) हिस्सों के सभी मेडिकल कॉलेज इस यूनिवर्सिटी से संबद्ध किए जाएंगे। इसके व्यापक दायरे में निम्नलिखित जिलों को शामिल किया गया है:
- भोपाल संभाग व मध्य क्षेत्र: भोपाल, रायसेन, विदिशा, सीहोर, राजगढ़
- नर्मदापुरम संभाग: नर्मदापुरम, बैतूल
- ग्वालियर-चंबल अंचल: ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, श्योपुर, गुना
- इंदौर व उज्जैन संभाग (मालवा-निमाड़): इंदौर, उज्जैन, देवास, धार, रतलाम, मंदसौर, नीमच, खरगोन, खंडवा, बड़वानी, बुरहानपुर
- सागर संभाग: सागर सहित पश्चिमी मध्य प्रदेश के सभी जिले।