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प्रॉपर्टी खरीदारों के लिए बड़ी खबर: MP में आ रहा है नया कॉलोनी एक्ट, अब एक क्लिक पर घर बैठे जांचें कॉलोनी वैध है या अवैध

नए डिजिटल पोर्टल पर कॉलोनी का नक्शा, अनुमति और रजिस्ट्री संबंधी पूरी जानकारी उपलब्ध होगी। नागरिक एक क्लिक में कॉलोनी की वैधता जांच सकेंगे।

By Digital DeskEdited By: bhupendra Singh Rajput
Publish Date: Sun, 19 Jul 2026 09:55:23 AM (IST)Updated Date: Sun, 19 Jul 2026 09:56:17 AM (IST)
प्रॉपर्टी खरीदारों के लिए बड़ी खबर: MP में आ रहा है नया कॉलोनी एक्ट, अब एक क्लिक पर घर बैठे जांचें कॉलोनी वैध है या अवैध
प्रतीकात्मक फोटो, एआई से तैयार की गई है।

HighLights

  1. घर बैठे पता चलेगा कॉलोनी वैध है या नहीं
  2. अवैध कॉलोनियों पर होगी सख्त कार्रवाई
  3. लापरवाह अफसरों पर जेल और जुर्माने का प्रावधान

डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश में अवैध कॉलोनियों और अवैध प्लॉटिंग के कारोबार पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए राज्य सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। सरकार इसके लिए 'मप्र कॉलोनी अधिनियम-2026' ला रही है, जिसका ड्राफ्ट पूरी तरह तैयार हो चुका है।

इस नए कानून के तहत एक विशेष डिजिटल पोर्टल भी बनाया जा रहा है, जिससे जनता को बड़ी राहत मिलेगी। अब कोई भी व्यक्ति घर बैठे सिर्फ एक क्लिक के जरिए यह जान सकेगा कि कोई कॉलोनी वैध है या नहीं।


इस पोर्टल से राजस्व, टीएंडसीपी (टाउन एंड कंट्री प्लानिंग), नगरीय प्रशासन, संपदा और रजिस्ट्री विभाग को आपस में जोड़ा जाएगा। सरकार का दावा है कि नए कानून के लागू होने से शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के अलग-अलग नियम खत्म हो जाएंगे और पूरे प्रदेश में एक एकीकृत कॉलोनी कानून लागू किया जाएगा।

एक साल में लागू होगा कानून

बता दें कि वर्तमान में इन्हीं अलग-अलग नियमों का फायदा उठाकर भोपाल, इंदौर और जबलपुर जैसे बड़े शहरों के आसपास के पेरी-अर्बन (अर्ध-शहरी) क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अवैध प्लॉटिंग हो रही है। सरकार का मानना है कि नया कानून इस लूपहोल को पूरी तरह खत्म कर देगा। कैबिनेट और विधानसभा की मंजूरी मिलने के बाद इस कानून को जमीन पर लागू होने में करीब एक वर्ष का समय लग सकता है।

4 श्रेणियों में पहचानी जाएंगी कॉलोनियां

नए ड्राफ्ट में कॉलोनियों को स्पष्ट रूप से चार अलग-अलग श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है, ताकि उनका निराकरण आसानी से हो सके:

1. नई वैध कॉलोनी: इनके लिए 45 दिनों में रजिस्ट्रेशन और 60 दिनों में अनुमति की समय-सीमा तय की गई है। समय पर अनुमति न मिलने पर 'डीम्ड अप्रूवल' (स्वतः मंजूरी) का प्रावधान होगा। इसके साथ ही 500 वर्गमीटर तक के क्षेत्र को इसमें छूट दी जाएगी।

2. अधूरी कॉलोनी: ऐसी कॉलोनियों में कमियों को सुधारने के लिए 15 दिनों का समय दिया जाएगा। यदि तय समय में सुधार नहीं होता है, तो आरडब्ल्यूए (रेसिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन) का गठन कर विकास कार्य पूरे कराए जाएंगे।

3. अवैध कॉलोनी: सरकारी जमीन, सड़क, पार्क, नदी-नाले और वन भूमि पर अवैध रूप से बसाई गई कॉलोनियों को बिना किसी राहत के सीधे तौर पर हटाया जाएगा।

4. विवादित कॉलोनी: तकनीकी और कानूनी उलझनों में फंसी कॉलोनियों के मामलों का निपटारा एक अलग विशेष प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा।

लापरवाही की तो अफसरों और पुलिस पर गिरेगी गाज

अवैध निर्माणों को बढ़ावा देने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर नकेल कसने के लिए कानून में कड़े दंडात्मक प्रावधान किए गए हैं:

- अपराध में सहयोगी मानेंगे: अपने क्षेत्र में अवैध कॉलोनियों पर सख्त कार्रवाई न करने वाले अफसरों को अब अपराध में सहयोगी माना जाएगा ।

- सजा और जुर्माना: दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों को 6 महीने की जेल और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना भुगतना होगा।

- पुलिस पर भी गाज: यदि अवैध निर्माण या कॉलोनियों को हटाने की कार्रवाई में पुलिस प्रशासन सहयोग नहीं करता है, तो संबंधित पुलिसकर्मियों व अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी।

3 बार आपत्ति की सीमा, 7 दिनों में करना होगा फैसला

ऑनलाइन सिस्टम को पारदर्शी और त्वरित बनाने के लिए अधिकारियों की कार्यप्रणाली को समय-सीमा में बांधा गया है:

- एक ही जगह सारी जानकारी: ऑनलाइन पोर्टल पर कॉलोनी का पूरा नक्शा, विकास अनुमति और रजिस्ट्री से जुड़ी सभी जानकारियां एक साथ उपलब्ध रहेंगी ।

- लंबित नहीं रहेंगी फाइलें: प्रक्रिया के दौरान अधिकारी अधिकतम 3 बार ही किसी आवेदन पर आपत्ति लगा सकेंगे। इसके अलावा, पोर्टल पर आया कोई भी आवेदन 7 दिनों से अधिक समय तक लंबित नहीं रखा जा सकेगा, 7 दिन के भीतर उस पर अंतिम कार्रवाई करना अनिवार्य होगा।