
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। शहर की व्यस्त सड़कों पर जिला प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस के प्रतिबंध के बावजूद ई-रिक्शा बेखौफ दौड़ रहे हैं। ऐशबाग इलाके में चार दिन पहले 17 वर्षीय किशोर की मौत और लगातार हो रहे हादसों के बाद भी न तो प्रशासन सख्त कार्रवाई कर पा रहा है और न ट्रैफिक सिस्टम में सुधार दिख रहा है।
जिला सड़क सुरक्षा समिति ने 18 जुलाई को स्कूली बच्चों को ले जाने पर ई-रिक्शा पर प्रतिबंध लगाया था, लेकिन शहर में स्थिति जस की तस है। नाबालिग चालकों की लापरवाही, तेज रफ्तार, अचानक मोड़ और बिना परमिट चल रहे हजारों ई-रिक्शा राजधानी में बड़ा खतरा बने हुए हैं।
रोशनपुरा चौराहा, जेल रोड, वीआइपी रोड और हमीदिया रोड सहित कई इलाकों में प्रतिबंध के बाद भी न कार्रवाई हुई, न निगरानी। ट्रैफिक पुलिस ने 23 जुलाई से एक सप्ताह के लिए 25.5 किमी लंबे 12 मार्गों पर ट्रायल के रूप में ई-रिक्शा रोकने का दावा किया था, लेकिन रिपोर्ट तैयार होने से पहले ही प्रतिबंध बेअसर हो गया। नतीजतन, इन मार्गों पर रोजाना खतरा बढ़ता जा रहा है।
शहर में 11 हजार से अधिक ई-रिक्शा बिना परमिट के चल रहे हैं, जिनमें से बड़ी संख्या नाबालिग संचालित करते हैं। कई बार चालक नशे में होते हैं और अचानक मोड़ लेने की वजह से हादसे होते हैं। सितंबर, अगस्त और जुलाई 2025 में कार और एसयूवी टक्कर के तीन बड़े हादसों में कई लोगों की मौत इसका प्रमाण है। खराब डिजाइन, कम संतुलन और ढलान पर बैक स्लिप जैसी तकनीकी खामियां इन दुर्घटनाओं को और बढ़ा रही हैं।