
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश के अस्पतालों में प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव (पोस्ट पार्टम हैमरेज -पीपीएच) से मातृ मृत्यु रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग सभी लेबर रूम में ऑब्स्ट्रेटिक ड्रेप (प्रसूति के दौरान रक्तस्राव मापने वाला बैग) उपलब्ध कराने जा रहा है। इसके माध्यम से प्रसव के दौरान होने वाले रक्तस्राव की मात्रा का अनुमान लगाने के बजाय उसे वास्तविक रूप से मापा जा सकेगा। प्रदेश का मातृ मृत्यु अनुपात (एमएमआर) 2020-22 में 159 प्रति एक लाख प्रसूताओं पर था।
वहीं, पीपीएच दुनियाभर में मातृ मृत्यु के प्रमुख कारणों में है और भारत में करीब 19.9 प्रतिशत प्रसूताओं की मृत्यु इस कारण होती हैं। ऐसे में इस व्यवस्था से अत्यधिक रक्तस्राव से होने वाली मौतों को रोका जा सकेगा। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश में एनीमिया भी बड़ी चुनौती है।
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे एनएफएचएस-पांच के अनुसार 15-49 वर्ष की 54.7 प्रतिशत महिलाएं खून की कमी यानी एनीमिया से पीड़ित हैं। ऐसे में प्रसव के दौरान रक्तस्राव की मात्रा की समय पर पहचान बेहद महत्वपूर्ण है।
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ड्रेप में एकत्र रक्त की मात्रा से पीपीएच की जल्द पहचान होगी और चिकित्सक समय पर उपचार शुरू कर सकेंगे। इसमें रक्त चढ़ाना भी शामिल है। प्रदेश में 1500 से अधिक प्रसव कक्ष हैं, जिनमें चरणबद्ध तरीके से ये बैग उपलब्ध कराए जाएंगे। मप्र पब्लिक हेल्थ सर्विसेस कारपोरेशन के माध्यम से इनकी खरीदी की जाएगी।
हालांकि,अभी भी घरों में ही जो प्रसव में हो रहे हैं, उनमें पीपीएच से जान जाने का जोखिम रहेगा। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण- छह के अनुसार प्रदेश में संस्थागत प्रसव 89.8 प्रतिशत ही है, यानी लगभग 10 प्रतिशत प्रसव अभी भी घरों में हो रहे हैं।