धनंजय प्रताप सिंह, भोपाल। नियम-कानून को ताक पर रख आबकारी विभाग के अफसर बिना किसी अनुमति बेखौफ विदेश घूम रहे हैं। सरकार की जानकारी में आने के बाद भी आला अफसर नियमों का उल्लंघन कर विदेश जाने वालों को बचाने का जतन कर रहे हैं। हवाला ये दिया जा रहा है कि अधिकारी ने विदेश जाने के लिए सरकार से अनुदान या सहायता नहीं ली।
फ्रांस- स्विट्जरलैंड घूम आए
जिला आबकारी अधिकारी धार के पद पर पदस्थ पराक्रम सिंह चंद्रावत ने राज्य सरकार से अनुमति लिए बिना 25 मई 2017 से 16 जून 2017 तक फ्रांस और स्विट्जरलैंड की यात्रा की। खास बात यह है कि जब मामला शासन के संज्ञान में आया तो आबकारी उपायुक्त इंदौर संजय तिवारी को जांच सौंपी गई।
मात्र 13 दिन पहले दिया आवेदन
चंद्रावत ने फ्रांस यात्रा के मात्र 13 दिन पहले 12 मई 2017 को कलेक्टर के माध्यम से सरकार से विदेश जाने की अनुमति मांगी। यह अनुमति उन्हें मिली नहीं, फिर भी वे विदेश यात्रा कर आए। इसमें खास बात यह है कि चंद्रावत ने वीजा पाने के लिए सरकार की ओर से अनापत्ति प्रमाण-पत्र भी पेश नहीं किया, फिर भी उन्हें वीजा मिल गया।
इसके अलावा टिकट, होटल बुकिंग से लेकर विदेश जाने के लिए अनिवार्य स्वास्थ्य बीमा चंद्रावत ने आवेदन देने से पहले ही करवा लिया था। जाहिर है अनुमति के बिना कोई भी अधिकारी वीजा नहीं प्राप्त कर सकता है। नियमों के तहत वीजा के लिए आवेदन एक महीने पहले देना होता है, यानी चंद्रावत ने पहले वीजा पाया और उसके बाद सरकार को अनुमति का आवेदन देने की औपचारिकता निभाई।
सरकार से अनुदान नहीं लिया
जानबूझकर नियमों का उल्लंघन कर विदेश यात्रा करने के मामले में चंद्रावत ने जवाब दिया कि राज्य सरकार के सारे परिपत्र उन कर्मचारियों-अधिकारियों पर लागू होते हैं, जिनकी यात्रा का व्यय शासकीय मद या अनुदान से किया गया हो। चंद्रावत ने हवाला दिया कि मेरे द्वारा जो विदेश यात्रा की गई, वे निजी कारणों एवं निजी व्यय से की गई। इस कारण सरकार को कोई आर्थिक बोझ नहीं वहन करना पड़ा।
जांच अधिकारी ने पर्दा डाला
आबकारी उपायुक्त संजय तिवारी ने यह कहकर चंद्रावत का बचाव करने की कोशिश की है कि उनके आवेदन और उस पर की गई कार्रवाई के अभिलेख उपलब्ध नहीं हैं। इसी का हवाला देकर जांच अधिकारी ने बिना निष्कर्ष अपनी रिपोर्ट शासन को भेज दी। इस मामले का खुलासा इंदौर निवासी राजेंद्र के. गुप्ता की शिकायत पर हुआ।
क्या हैं नियम
मप्र सिविल सेवा आचरण नियम के तहत कोई भी सरकारी कर्मचारी-अधिकारी राज्य सरकार की अनुमति के बिना विदेश यात्रा नहीं कर सकता है। पासपोर्ट बनवाने और वीजा के लिए आवेदन करने से पहले उसे विभाग से अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त करना अनिवार्य है।
निलंबन अवधि में दुबई घूमने की शिकायत
सूत्रों के मुताबिक राज्य आबकारी उड़नदस्ता में तैनात सहायक आयुक्त संजीव कुमार दुबे के खिलाफ भी निलंबन अवधि में बिना अनुमति के दुबई यात्रा करने की शिकायत लंबित है। दुबे ने विदेश यात्रा पर जाने के मात्र दस दिन पहले प्रमुख सचिव के समक्ष आवेदन कर दुबई जाने की अनुमति मांगी थी। दुबे राजपत्रित अधिकारी हैं। सहायक आबकारी आयुक्त दुबे को कुछ ही दिन पहले इंदौर पदस्थ रहने के दौरान एक घोटाले के चलते निलंबित किया गया था।
मामला शासन स्तर पर लंबित: कमिश्नर
आबकारी आयुक्त अरुण कोचर के मुताबिक सहायक आबकारी आयुक्त संजीव दुबे ने आवेदन जरूर दिया था, लेकिन अनुमति नहीं मिलने के कारण वे विदेश भी नहीं गए। चंद्रावत ने भी आवेदन दिया था, जो शासन को मंजूरी के लिए भेजा गया था। मामला शासन स्तर पर लंबित है। निर्णय शासन लेगा।
अनुमति लेना अनिवार्य
स्वयं के खर्च पर कोई अधिकारी विदेश जाता है तो भी उसे सरकार की अनुमति लेना अनिवार्य है। अफसरों ने नियम का उल्लंघन किया है तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।
- जयंत मलैया, वाणिज्यिक कर मंत्री मप्र