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भोपाल के छोटे तालाब के वजूद पर संकट, एनजीटी ने केंद्र और राज्य सरकार सहित सात विभागों को जारी किया नोटिस

भोपाल के छोटे तालाब में बढ़ते प्रदूषण, अतिक्रमण और सीवेज मिलने को लेकर दायर याचिका पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाया है और राज्य सर...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Mohan Kumar
Publish Date: Fri, 03 Apr 2026 01:50:29 PM (IST)Updated Date: Fri, 03 Apr 2026 01:50:47 PM (IST)
भोपाल के छोटे तालाब के वजूद पर संकट, एनजीटी ने केंद्र और राज्य सरकार सहित सात विभागों को जारी किया नोटिस
छोटे तालाब में लगातार बढ़ रहा प्रदूषण

HighLights

  1. छोटे तालाब में लगातार प्रदूषण और अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है
  2. रामसर साइट में मिल रहा सीवेज और कचरा, ट्रिब्यूनल ने मांगा जवाब
  3. तालाब में काई जमने लगी है, जिससे पानी में ऑक्सीजन कम हो रही है

नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। छोटे तालाब में बढ़ते प्रदूषण, अतिक्रमण और सीवेज मिलने को लेकर दायर याचिका पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाया है। तालाब के संरक्षण में हो रही लापरवाही पर एनजीटी ने केंद्र और राज्य सरकार सहित सात विभागों को नोटिस जारी किया है।

पर्यावरणविद् राशिद नूर खान ने याचिका में बताया गया है छोटा तालाब अपनी प्राकृतिक सुंदरता और जल क्षमता खो रहा है। तालाब की सीमाओं से छेड़छाड़ कर मलबे की डंपिंग की जा रही है, इससे न केवल तालाब का आकार छोटा हो रहा है, बल्कि भूजल पुनर्भरण की क्षमता भी कम हो रही है।


याचिका के साथ पेश की गई तस्वीरों से स्पष्ट है कि खुले नालों और पाइपलाइनों के जरिए बिना ट्रीटमेंट के गंदा पानी सीधे तालाब में गिर रहा है, इससे तालाब में काई जमने लगी है, जिससे पानी में ऑक्सीजन कम हो रही है और जलीय जीवों के जीवन पर संकट खड़ा हो गया है।

तालाब के किनारों पर भारी मात्रा में प्लास्टिक, घरेलू कचरा और निर्माण सामग्री बिखरी पड़ी है। यह कचरा न केवल पानी के प्रवाह को रोक रहा है, बल्कि शहर के सालिड वेस्ट मैनेजमेंट की पोल भी खोल रहा है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता हर्षवर्धन तिवारी ने ट्रिब्यूनल को बताया कि नियमों को ताक पर रखकर तालाब के सुरक्षित बफर जोन'' में लगातार अवैध निर्माण और मानवीय गतिविधियां जारी हैं, यह सीधे तौर पर पर्यावरण कानूनों का उल्लंघन है।

यह भी पढ़ें- पर्यावरणीय मंजूरी के नियमों में बड़ा बदलाव: अब 45 दिन में 'सिया' मौन रही, तो मुख्य सचिव लेंगे फैसला

ट्रिब्यूनल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी संबंधित विभागों से इस पर्यावरणीय गिरावट को रोकने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी है। अधिकरण ने मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीपीसीबी), केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), नगर निगम, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीएंडसीपी), केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय, एप्को और भोज वेटलैंड अथारिटी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।