डिजिटल डेस्क, भोपाल/रायसेन। कुछ सपने पूरे नहीं होते, लेकिन उनका अधूरा रह जाना हमेशा हार नहीं होता। कई बार वही असफलताएं इंसान को ऐसी मंजिल तक पहुंचा देती हैं, जिसके बारे में उसने कभी सोचा भी नहीं होता। रायसेन जिले के ग्राम ऊषापुर के किसान परिवार से आने वाले राजीव कुशवाहा की कहानी भी कुछ ऐसी ही है।
राजीव ने चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) बनने का सपना देखा। इसके लिए उन्होंने कई प्रयास किए और सीए-सीपीटी तथा सीए-आईपीसीसी ग्रुप-1 की परीक्षा भी पास की, लेकिन लगातार प्रयासों के बाद भी सीए की मंजिल हासिल नहीं कर सके।
आखिरकार उन्हें सीए की तैयारी छोड़नी पड़ी। यह उनके लिए मुश्किल दौर था, लेकिन उन्होंने पढ़ाई और आगे बढ़ने का प्रयास नहीं छोड़ा। उन्होंने अपने कॉमर्स विषय की पढ़ाई को ही करियर का आधार बनाया और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कदम रखा।
नवोदय में मिली सीख बनी सफलता का मंत्र
राजीव के पिता निर्भय सिंह सिलवानी तहसील के ग्राम ऊषापुर में किसान हैं। राजीव ने कक्षा छठी से 12वीं तक जवाहर नवोदय विद्यालय, बाड़ी में पढ़ाई की। नवोदय विद्यालय में पढ़ाई के साथ उन्हें अनुशासन और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की सीख मिली।
राजीव बताते हैं कि स्कूल के दिनों में उनके मन में एक बात बैठ गई थी-
“हार नहीं माननी है, चाहे परिस्थितियां कैसी भी हों। मंजिल मिलने तक कोशिश करते रहना है।” यही सोच आगे उनके संघर्ष में सबसे बड़ा सहारा बनी।
12वीं के बाद उन्होंने बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय, भोपाल से बीकॉम और एमकॉम (फाइनेंस) की पढ़ाई की। इसके बाद सीए बनने की तैयारी शुरू की। उन्होंने सीए-सीपीटी और सीए-आईपीसीसी ग्रुप-1 पास किया, लेकिन कई प्रयासों के बाद सीए की तैयारी छोड़ने का फैसला किया।
पांच बार नेट क्वालीफाई, जून 2026 में नेट-जेआरएफ
सीए की तैयारी के दौरान कॉमर्स विषय में विकसित हुई रुचि को राजीव ने आगे बढ़ाया। उन्होंने उच्च शिक्षा में करियर बनाने का निर्णय लिया और यूजीसी नेट की तैयारी शुरू की। मेहनत का परिणाम यह रहा कि उन्होंने पांच बार यूजीसी नेट क्वालीफाई किया। जून 2026 में उन्होंने कॉमर्स विषय में नेट-जेआरएफ भी हासिल किया।
राजीव के अनुसार सीए की तैयारी के दौरान पढ़े गए विषय और अध्ययन सामग्री ने आगे की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में भी उनकी मदद की।
दो साल बाद मिली सफलता
राजीव ने एमपीपीएससी असिस्टेंट प्रोफेसर (कॉमर्स) परीक्षा-2022 में भी हिस्सा लिया था। वह लिखित परीक्षा पास कर इंटरव्यू तक पहुंचे, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो सका। इसके बावजूद उन्होंने इसे अपनी यात्रा का अंत नहीं माना और दोबारा तैयारी शुरू कर दी।
इस बार उन्होंने लिखित परीक्षा के लिए सेल्फ स्टडी को आधार बनाया। इंटरव्यू की तैयारी के लिए दोस्तों के साथ चर्चा और मॉक इंटरव्यू किए। लगातार प्रयास का परिणाम उन्हें एमपीपीएससी असिस्टेंट प्रोफेसर (कॉमर्स) परीक्षा-2024 की मेरिट सूची में चयन के रूप में मिला।
असफलता को अनुभव मानकर आगे बढ़ते रहे
राजीव अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, परिवार और दोस्तों के सहयोग को देते हैं। किसान परिवार से निकलकर सीए की तैयारी, फिर यूजीसी नेट, नेट-जेआरएफ और अंततः एमपीपीएससी असिस्टेंट प्रोफेसर बनने तक का उनका सफर लगातार प्रयास की कहानी है।
राजीव का मानना है कि किसी परीक्षा में असफल होना मंजिल का अंत नहीं है। यह अगली कोशिश के लिए अनुभव भी बन सकता है। उनका सफर उन युवाओं के लिए संदेश देता है जो प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार प्रयास के बावजूद सफलता का इंतजार कर रहे हैं- रास्ता बदलना हार नहीं है, अगर मंजिल तक पहुंचने की कोशिश जारी रहे।