
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। डिजिटल अरेस्ट द्वारा साइबर ठगी के मामले में मध्य प्रदेश में पहली बार किसी अपराधी को सजा सुनाई गई है।
श्यामला हिल्स निवासी एक महिला व्यापारी से 44 लाख रुपये ठगी मामले में गिरफ्तार म्यूल खाता धारक दिनेश खिंची को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी कपिल बौरासी की अदालत ने शनिवार को दोषी ठहराया। उसे तीन वर्ष के कठोर कारावास और 25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई है।
अभियोजन अधिकारी कविता यादव ने बताया कि 30 सितंबर 2024 को पीड़िता ने क्राइम ब्रांच की साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई थी। महिला ने बताया कि उसके वाट्सएप पर एक काल आया।
फोन करने वाले ने खुद को साइबर पुलिस अधिकारी बताया और कहा कि उसके मोबाइल नंबर से अवैध काल किए जा रहे हैं। आरोपित ने यह भी कहा कि उसके कैनरा बैंक खाते से मनी लांड्रिंग हो रही है और उसके खिलाफ केस दर्ज कर उसे जेल भेजा जाएगा।
ठग ने महिला को डराकर डिजिटल अरेस्ट में रखने की बात कही। लगातार फोन और वीडियो काल के जरिए उसे मानसिक दबाव में रखा गया, ताकि वह किसी से संपर्क न कर सके। ठग ने महिला को जेल से बचाने का झांसा देकर अलग-अलग किस्तों में 44 लाख रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर करा लिए।
क्राइम ब्रांच की साइबर सेल ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। सामने आया कि ठगी के 44 लाख रुपये में से 36 लाख रुपये राजस्थान के अजमेर निवासी 27 वर्षीय दिनेश खिंची के खाते में भेजे गए थे।
25 फरवरी 2025 को जांच अधिकारी रमन शर्मा के नेतृत्व में पुलिस ने दिनेश खिंची को अजमेर के किशनगढ़ से गिरफ्तार किया था। आरोपित वहां भेड़ फार्म चलाता था।