भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। यदि अब आप सूखा, गीला और जैव अपशिष्ट कचरा एक ही डस्टबिन में रखकर डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन वाले को देते हैं तो निगम रिहायशी क्षेत्र से एक हजार और व्यवसायिक क्षेत्र से 5 हजार रुपए तक स्पॉट फाइन वसूलेगा। इंदौर नगर निगम के बाद अब भोपाल नगर निगम ने भी उत्पादन स्थल से ही कचरे को अलग-अलग रखना अनिवार्य किया है। भारत सरकार द्वारा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016 के प्रावधानों को अमल में लाते हुए यह व्यवस्था अनिवार्य की गई है।
इस नियम और व्यवस्था का पालन न करने वालों के विरुद्ध स्पॉट फाइन निर्धारित करते हुए निगम के स्वास्थ्य, सहायक स्वास्थ्य अधिकारी को अधिकृत किया है। जिसके तहत सभी रहवासियों, व्यवसायिक, सार्वजनिक व अन्य प्रतिष्ठानों द्वारा कचरे का पृथकीकरण न करने पर रहवासी श्रेणी के उपभोक्ताओं से अधिकतम 1000 रुपए व व्यवसायिक उपभोक्ताओं से अधिकतम 5000 रुपए का जुर्माना वसूला जाएगा। निगम अधिकारियों के अनुसार डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन वाहनों में गीले और सूखे कचरे के लिए अलग-अलग कंपार्टमेंट बनाए गए हैं। साथ ही घरेलू जैव अपशिष्ट के लिए गाड़ी के पिछले भाग में एक कंटेनर लगाया है।
ऐसे समझें गीले, सूखे कचरे में अंतर
- गीला कचरा : किचिन से उत्पन्न् बनी खाद्य सामग्री फल, सब्जी के छिलके, घास, पेड़ों की पत्तियां, राख, चायपत्ती, बचा हुआ भोजन आदि गीला कचरा है, इसे हरे कंपार्टमेंट में डालना होगा।
- सूखा कचरा : कचरे के रूप में निकलने वाले पेपर, पॉलीथिन, कांच की बोतले, पैकेजिंग मटेरियल, कपड़े आदि को नीले कंपार्टमेंट में डालना होगा।
- जैव अपशिष्ट : डायपर, सेनेटरी नेपकिन, मॉस्किटोज रेप्लेंट, डिशकार्डेट दवाइयां आदि जैव अपशिष्ट को कचरा वाहन में पीछे की ओर लगे कंटेनर में ही डाला जा सकेगा।
कचरे को अलग-अलग रखने की इसलिए पड़ी जरूरत
नगर निगम स्वच्छता सर्वेक्षण 2017 और 2018 में लगातार दूसरी बार स्वच्छता में देश में नंबर दो पर रहा। इंदौर गीला और सूखा कचरा अलग-अलग करने की अनिवार्यता पिछले साल ही लागू कर चुका है। जो लोग अलग-अलग कचरा नहीं रखते वहां निगम का डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन करने वाला अमला कचरा वापस कर देते हैं। लेकिन भोपाल में अब यह व्यवस्था लागू की गई है।