
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। राजधानी के करीब दो दशक से लंबित मास्टर प्लान-2047 का ड्राफ्ट प्रशासनिक स्तर पर तैयार हो चुका है और अब इसके सार्वजनिक होने का इंतजार है। मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के समक्ष प्रस्तुतीकरण के बाद अंतिम मसौदा तैयार होने की जानकारी सामने आई है।
इस बीच दिशा (जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति) की बैठक में मास्टर प्लान को लेकर हुए राजनीतिक विवाद ने इस मुद्दे को और चर्चा में ला दिया है। हालांकि सत्ता और विपक्ष दोनों ने एक स्वर में माना है कि भोपाल के सुनियोजित विकास के लिए मास्टर प्लान को अब और टालना उचित नहीं होगा।
जानकारी के अनुसार भोपाल का मास्टर प्लान वर्ष 1995 के बाद प्रभावी रूप से अपडेट नहीं हो सका। वर्ष 2031 के लिए तैयार मसौदा भी विभिन्न प्रशासनिक और राजनीतिक कारणों से लागू नहीं हो पाया। अब "अमृत काल-2047" की अवधारणा के अनुरूप टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीएंडसीपी) ने नया मास्टर प्लान तैयार किया है, जिसे उच्च प्रशासनिक स्तर पर सहमति मिल चुकी है। अधिकारियों के अनुसार ड्राफ्ट जल्द सार्वजनिक कर नागरिकों से आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए जाएंगे।
शुक्रवार को कलेक्ट्रेट में आयोजित दिशा समिति की बैठक में मास्टर प्लान को लेकर कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद व आतिफ अकील और फंदा जनपद पंचायत अध्यक्ष के बीच तीखी नोंकझोंक हुई, जिसके बाद कांग्रेस विधायकों ने बैठक का बहिष्कार कर दिया। विवाद के बावजूद बैठक का प्रमुख मुद्दा शहर के विकास के लिए मास्टर प्लान को शीघ्र लागू कराने का ही रहा।
सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि भोपाल के व्यवस्थित विकास के लिए सभी विधायकों एवं जनप्रतिनिधियों के साथ मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव से मुलाकात कर मास्टर प्लान जल्द जारी करने का आग्रह किया जाएगा। वहीं कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर सरकार को समर्थन देने की बात कही है।
सोशल मीडिया पर शनिवार को भी मास्टर प्लान की चर्चा तेज रही। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सांसद आलोक शर्मा के प्रयासों की सराहना करते हुए धन्यवाद लिखा कि भोपाल का मास्टर प्लान अत्यंत आवश्यक है और इसे तत्काल लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में मास्टर प्लान की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी थी।
शहरी विकास से जुड़े जानकारों का कहना है कि मास्टर प्लान लागू होने में लगातार हो रही देरी के कारण शहर का विस्तार बिना समुचित योजना के हुआ है। इसके चलते ट्रैफिक, अवैध कालोनियां, आधारभूत सुविधाओं पर दबाव व पर्यावरण संरक्षण जैसी चुनौतियां लगातार बढ़ी हैं। अब ड्राफ्ट सार्वजनिक होने के बाद आपत्तियों व सुझावों के निराकरण के पश्चात इसे अधिसूचित किए जाने की उम्मीद है।
भोपाल के भविष्य को देखते हुए मास्टर प्लान जल्द लागू होना चाहिए। सभी जनप्रतिनिधियों के साथ मुख्यमंत्री से मुलाकात कर इसे शीघ्र जारी कराने का आग्रह करेंगे।- आलोक शर्मा, सांसद
भोपाल का मास्टर प्लान अति आवश्यक है। इस विषय पर सांसद आलोक शर्मा के प्रयासों का समर्थन है। शहर के विकास के लिए इसे तत्काल लागू किया जाना चाहिए।- दिग्विजय सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री
विकास की बैठकों में केवल विकास की बात होनी चाहिए। मास्टर प्लान पर राजनीति नहीं, बल्कि शहर के भविष्य को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।- उमाशंकर तिवारी, सामाजिक कार्यकर्ता