'बांग्लादेश से लाकर भारत में बेचने की साजिश': अंतर्राष्ट्रीय मानव तस्करी गिरोह का पर्दाफाश, म्यांमार की 4 युवतियां बरामद
पुलिस के अनुसार युवतियों को बांग्लादेश के शरणार्थी शिविर से अवैध रूप से भारत लाया गया था और जम्मू-श्रीनगर में शादी कराने की योजना थी।
Publish Date: Sun, 04 Oct 2026 08:34:46 PM (IST)Updated Date: Sun, 04 Oct 2026 08:34:46 PM (IST)
प्रतीकात्मकHighLights
- भोपाल कंट्रोल रूम की सूचना पर जीआरपी ग्वालियर ने की कार्रवाई
- ट्रेन के जनरल कोच से म्यांमार निवासी मुबीन को हिरासत में लिया
- अलीगढ़ में दबिश देकर 4 म्यांमार निवासी युवतियों को बरामद किया
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल/ ग्वालियर । जीआरपी ने अंतर्राष्ट्रीय मानव तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए बांग्लादेश के कुतुपालोंग शरणार्थी शिविर से अवैध रूप से सीमा पार कराकर भारत में बेचने(शादी के लिए) लाई गई म्यांमार की चार युवतियों और मानव तस्करी में शामिल म्यांमार के दो पुरुषों को पकड़ा है।
दोनों मुख्य आरोपी रोहिंग्या मुसलमान हैं और भारत में अवैध रूप से रह रहे थे। चारों युवतियों को जम्मू-कश्मीर ले जाया जा रहा था। स्वर्ण जयंती एक्सप्रेस के जनरल कोच से एक बिचौलिया पकड़ा गया था। उससे पूछताछ के बाद जीआरपी की टीम ने उत्तरप्रदेश के अलीगढ़ में दूसरे बिचौलिये के यहां दबिश दी।
यहां से चारों युवतियों को बरामद किया गया है। यह बिचौलिया भी भारत में बगैर नागरिकता के रह रहा था और मूल रूप से म्यांमार का रहने वाला है।
ट्रेन में दबिश, आधा घंटा चली सर्चिंग
एसपी जीआरपी अंकित जायसवाल ने बताया कि भोपाल कंट्रोल रूम मुखबिर से सूचना मिली थी कि ट्रेन क्रमांक 12643 स्वर्ण जयंती एक्सप्रेस के जनरल कोच में म्यांमार निवासी संदिग्ध युवक सफर कर रहा है, जो अवैध रूप से लड़कियों की भारत में तस्करी कर शादी कराता है।
इस पर जीआरपी थाना प्रभारी ग्वालियर को अलर्ट किया गया और उन्होंने टीम के साथ ट्रेन में चेकिंग अभियान चलाया और हुलिए के आधार पर आरोपित मुबीन (25) निवासी बूशीदंग थम्बाजार म्यांमार (हाल निवासी हैदराबाद) को हिरासत में लिया। वह अभी हैदराबाद स्थित रायल कालोनी बालापुर में रह रहा था। उसका परिवार भी हैदराबाद में रहता है।
गूगल ट्रांसलेटर की मदद से सुलझी गुत्थी
पूछताछ में आरोपित मुबीन ने बताया कि उसका साथी मोहम्मद हसन (35) निवासी म्यांमार युवतियों को लेकर अलीगढ़ के एक किराए के मकान में रुका है। पुलिस ने अलीगढ़ में दबिश देकर मो. हसन के कब्जे से चार युवतियों (जिनमें दो नाबालिग हैं) को दस्तयाब किया।
युवतियों को केवल बंगाली-असमिया भाषा आती थी, जिससे भाषा संबंधी समस्या आई। इसके बाद पुलिस ने गूगल ट्रांसलेटर और द्विभाषी (ट्रांसलेटर) की मदद से पूछताछ की। तब खुलासा हुआ कि इन्हें बेचने के लिए भारत लाया गया था।
जीआरपी एसपी अंकित जायसवाल इस मामले में अभी और पूछताछ होना बाकी है। द्विभाषिये की मांग की गई है। जिससे इनसे आसानी से पूछताछ हो सके।
नदी-पहाड़ों के रास्ते घुसाया, जम्मू-श्रीनगर में तय की थी शादी
पूछताछ में सामने आया कि युवतियों को बांग्लादेश के कुतुपालोंग रिफ्यूजी शरणार्थी शिविर से उनके माता-पिता की सहमति बताकर नदी और पहाड़ों के दुर्गम रास्तों से अवैध रूप से भारतीय सीमा में दाखिल कराया गया था।
आरोपित इनकी शादी जम्मू एवं श्रीनगर में कराने की योजना बना रहे थे। वैधानिक कार्रवाई के बाद चारों युवतियों को डिपोर्ट किया जाएगा।
रोहिंग्या मुसलमानों का गिरोह बांग्लादेश-म्यांमार की लड़कियों को भारत में अवैध रूप से प्रवेश कराकर बेच रहा है। इसकी सूचना मिली थी। इसके बाद टीम को लगाया गया। ग्वालियर यूनिट ने कार्रवाई करते हुए दो मुख्य आरोपितों को पकड़ा है। अलीगढ़ से चार युवतियां बरामद हुई हैं, जो म्यांमार की रहने वाली हैं। अभी इसमें और खुलासे होंगे। - राजाबाबू सिंह, स्पेशल डीजी, रेल