
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश में सब्जियों के अनियंत्रित बाजार भाव को स्थिर करने के लिए प्रदेश में ही प्याज और लहसुन जैसी फसलों के पर्याप्त उत्पादन को प्रोत्साहित किया जाएगा। किसानों को रियायती दरों पर उच्च गुणवत्ता के बीज उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके लिए राज्य सरकार ने प्याज और लहसुन के क्लस्टर विकसित करने की योजना बनाई है।
उद्यानिकी संचालनालय ने इसका प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा है। इसके अलावा फल व फूलों के क्लस्टर विकास का जिलों को लक्ष्य दिया जाएगा। मंदिर स्थलों के पास फूलों के क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। इसकी पूरी कार्य योजना बनाई जा रही है।
सिंहस्थ-2028 के मद्देनजर उज्जैन में सेंटर फार एक्सीलेंस फ्लोरीकल्चर की स्थापना की जा रही है। उद्यानिकी फसलों को प्रोत्साहित करने के लिए जून में आम, जुलाई में मिर्च महोत्सव आयोजित किया गया।
अब बुरहानपुर, इंदौर, ग्वालियर में क्रमश: केला, सब्जी और अमरूद महोत्सव आयोजित किए जाएंगे। वर्ष 2030 तक उद्यानिकी क्षेत्र का रकबा 30 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य है। किसानों की उपज बर्बाद न हो, इसके लिए फूड प्रोसेसिंग यूनिट (खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों) की स्थापना पर सरकार द्वारा 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जा रही है। योजना के अंतर्गत प्रमुख जिलों में विशिष्ट फल, सब्जी उत्पादन, प्रसंस्करण और परिवहन को जोड़ा जाएगा।
प्रदेश सरकार के उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा उद्यानिकी फसलों (फल, सब्जी, मसाले व फूल) को बढ़ावा देने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए आम महोत्सव जून में भोपाल में आयोजित किया जा चुका है। केला महोत्सव सितंबर में बुरहानपुर में आयोजित होना है। इसी तरह सब्जी महोत्सव अक्टूबर में इंदौर में, अमरूद महोत्सव नवंबर में ग्वालियर में आयोजित किया जाएगा।
दिसंबर में ग्वालियर में मधुमक्खी पालन व्यवसाय के प्रोत्साहन एवं जागरूकता के लिए एक कार्यशाला/सेमिनार भी आयोजित की जाएगी। राज्य स्तरीय पुष्प महोत्सव (भोपाल) और कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए बलराम कृषि महोत्सव जैसे बड़े आयोजन भी किए जा रहे हैं।
इंदौर, उज्जैन, देवास, शाजापुर और छिंदवाड़ा जैसे चिन्हित प्रोडक्शन क्लस्टर्स में बाजार की मांग और क्षेत्र की क्षमता के अनुसार उच्च मूल्य वाली सब्जियां, फल और मसाले उगाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
किसानों की उपज बर्बाद न हो, इसके लिए फूड प्रोसेसिंग यूनिट (खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों) की स्थापना पर सरकार द्वारा 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जा रही है ताकि फल-सब्जियों के पल्प, पाउडर या फ्लेक्स बनाकर उन्हें बड़े बाजारों में एक्सपोर्ट किया जा सके।
शहरी क्षेत्रों में ताजी सब्जियों की निरंतर मांग को पूरा करने और स्थानीय किसानों को सीधा बाजार उपलब्ध कराने के लिए राष्ट्रीय कृषि विकास योजना और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 के तहत क्लस्टर आधारित खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। योजना के तहत सब्जी उत्पादक किसानों को प्रति हेक्टेयर निर्धारित इकाई लागत 60,000 पर 40 प्रतिशत (अधिकतम 24,000 प्रति हेक्टेयर) तक का अनुदान दिया जाता है।