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कूनो में नहीं विकसित हुए घास के मैदान, चीतों को नहीं मिल रहा पर्याप्त शिकार; बस्तियों में कर रहे शिकार

विशेषज्ञों ने चीतों को खुले जंगल में छोड़ने से पहले उनकी सुरक्षा के उपाय करने की बात कही थी लेकिन अमल नहीं हुआ।

By Sourabh SoniEdited By: Rajdil Shivhare
Publish Date: Sun, 08 Nov 2026 11:30:12 AM (IST)Updated Date: Sun, 08 Nov 2026 11:30:47 AM (IST)
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कूनो में नहीं विकसित हुए घास के मैदान, चीतों को नहीं मिल रहा पर्याप्त शिकार; बस्तियों में कर रहे शिकार

HighLights

  1. शिकार की कमी से बस्तियों का रुख
  2. क्षमता से अधिक हैं कूनो में चीते
  3. अप्राकृतिक मौतों पर उठे सवाल

सौरभ सोनी, नईदुनिया भोपाल। चीता पुनर्स्थापना परियोजना के तहत कूनो राष्ट्रीय उद्यान में घास के मैदान अपेक्षित मात्रा में विकसित नहीं किए गए, इससे शाकाहारी वन्य प्राणियों की कमी बनी हुई है। चीतों को पर्याप्त शिकार नहीं मिल पा रहा है। इस बीच चीतों की संख्या भी बढ़ी है और वे मानव बस्तियों में घुसकर पालतू मवेशियों का शिकार कर रहे हैं।

दरअसल, चीतों को खुले जंगल में छोड़ने से पहले कई सुरक्षा उपायों जैसे घास के मैदानों का विकास और ग्रामीणों के विस्थापन पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। इससे चीतों के कूनो के जंगल से बाहर पड़ोसी राज्यों में पलायन और मवेशियों के शिकार के मामले बढ़े हैं।


अप्राकृतिक मृत्यु ने निगरानी तंत्र पर खड़े किए सवाल

विशेषज्ञों ने चीतों को खुले जंगल में छोड़ने से पहले उनकी सुरक्षा के उपाय करने की बात कही थी लेकिन अमल नहीं हुआ। वन विभाग दावा करता है कि प्रत्येक चीते की निगरानी में पांच वनकर्मी रहते हैं, लेकिन चीतों की अप्राकृतिक मृत्यु ने निगरानी तंत्र पर सवाल खड़े किए हैं।

1500 चीतल भी छोड़े गए

कूनो में कई किस्तों में अब तक 1500 चीतल (हिरण की एक प्रजाति) छोड़े जा चुके हैं लेकिन यहां तेंदुओं की मौजूदगी के चलते चीतों को पर्याप्त शिकार नहीं मिल पा रहा है। इस क्षेत्र में तेंदुए हर उस जगह पर हैं, जहां चीतल, जंगली सूअर, हिरण जैसे शिकार उपलब्ध हैं। चीता तेंदुओं से दूरी बनाकर रखता है। एक अहम बात यह भी है कि कूनो राष्ट्रीय उद्यान 25 चीतों की संख्या के हिसाब से उपयुक्त माना गया था। फिलहाल शावकों सहित यहां 52 चीते हैं।

मैंने विभाग में रहते हुए बार-बार यही बात कही थी कि चीतों के लिए प्राकृतिक तरीके से शिकार उपलब्ध कराने का प्रयास होना चाहिए। चीतल या अन्य शाकाहारी वन्य जीव कूनो में छोड़ भी दिए गए और इनकी सुरक्षा नहीं हुई तो इसका कोई मतलब नहीं। -वीएन अम्बाड़े, सेवानिवृत्त वन बल प्रमुख, मध्य प्रदेश

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