भोपाल में 5वें दिन भी डटे अतिथि विद्वान; गिटार बजाकर प्रदर्शन, हायर एजुकेशन कमिश्नर ने दिया आश्वासन
अतिथि विद्वान नियमितीकरण और स्थायित्व के लिए नीति बनाने की निश्चित समय-सीमा तय करने तथा स्थायी नीति लागू होने तक फालेन आउट प्रक्रिया रोकने की मांग कर ...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 20 Sep 2026 09:27:55 PM (IST)Updated Date: Sun, 20 Sep 2026 09:27:55 PM (IST)
नीलम पार्क में अतिथि विद्वानों के धरना-प्रदर्शन में समझाने पहुंचे उच्च शिक्षण आयुक्त प्रबल सिपाहा। फोटो- आयोजकHighLights
- नियमितीकरण और स्थायित्व की मांग पर अतिथि विद्वानों का पांचवें दिन धरना
- फालेन आउट प्रक्रिया रोकने और स्थायी नीति की समय-सीमा तय करने की मांग
- उच्च शिक्षा आयुक्त ने धरना स्थल पहुंचकर अतिथि विद्वानों से की मुलाकात
नईदुनिया प्रतिनिधि,भोपाल। नियमितीकरण और स्थायित्व की मांग को लेकर अतिथि विद्वानों का धरना रविवार को पांचवें दिन भी जारी रहा। नीलम पार्क में धरने पर बैठे शिक्षकों ने रविवार को गिटार की धुन पर गीत गाकर अपनी स्थिति और नौकरी की अनिश्चितता बयां की।
अतिथि विद्वानों का कहना है कि वर्षों से उच्च शिक्षा संस्थानों में सेवाएं देने के बावजूद उनका भविष्य सुरक्षित नहीं है।अतिथि विद्वान इससे पहले उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार के बंगले के बाहर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे थे।
प्रतिनिधिमंडल और मंत्री के बीच बातचीत बेनतीजा रहने के बाद पुलिस ने अतिथि विद्वानों को वहां से हटाकर नीलम पार्क भेज दिया। अब अतिथि विद्वान फालेन आउट प्रक्रिया बंद करने की मांग पर अड़े हैं।
मिलने पहुंचे उच्च शिक्षा आयुक्त
रविवार दोपहर में उच्च शिक्षा आयुक्त प्रबल सिपाहा भी धरना स्थल पहुंचे और अतिथि विद्वानों से मुलाकात की। उन्होंने अतिथि विद्वानों को उनकी मांग पूरी करने का आश्वासन दिया।
प्रदर्शन के दौरान बुधवार को करीब 200 अतिथि विद्वानों ने केंद्रीय कृषि मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का काफिला रोककर 11 सितंबर 2023 की महापंचायत में किए गए आश्वासन की याद दिलाई थी। अतिथि विद्वानों को अपनी मांग मुख्यमंत्री तक पहुंचाने का आश्वासन मिला।
दो प्रमुख मांगों पर कायम
अतिथि विद्वान नियमितीकरण और स्थायित्व के लिए नीति बनाने की निश्चित समय-सीमा तय करने तथा स्थायी नीति लागू होने तक फालेन आउट प्रक्रिया रोकने की मांग कर रहे हैं।
उनका कहना है कि जुलाई 2026 में सरकार ने बेहतर नीति बनाने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक ठोस नीति सामने नहीं आई है।