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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 02, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Guru Purnima 2023: बुधादित्य और ब्रह्म शुभ योग में सोमवार को मनेगी गुरु पूर्णिमा, भोपाल में 15 जगहों पर होंगे बड़े आयोजन

गुरु पूर्णिमा पर इंद्र योग प्रात:काल से दोपहर 12:15 बजे तक है। इस योग में गुरुदक्षिणा लेना बेहद शुभ माना गया है।

By Ravindra SoniEdited By: Ravindra Soni
Publish Date: Sun, 02 Jul 2023 07:55:40 AM (IST)Updated Date: Sun, 02 Jul 2023 07:55:40 AM (IST)
Guru Purnima 2023: बुधादित्य और ब्रह्म शुभ योग में सोमवार को मनेगी गुरु पूर्णिमा, भोपाल में 15 जगहों पर होंगे बड़े आयोजन

भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि तीन जुलाई सोमवार को है। इसे गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। राजधानी भोपाल में धूमधाम से गुरु पूर्णिमा मनाई जाएगी। 15 से अधिक जगहों पर बड़े आयोजन होंगे, जिसकी तैयारी जोर-सोर से चल रही है। मां चामुंडा दरबार के पंडित रामजीवन दुबे गुरुजी ने बताया कि इस बार गुरु पूर्णिमा पर वाशी, सुनफा, बुधादित्य और ब्रह्म योग जैसे शुभ योगों का संयोग रहेगा। वहीं मिथुन, कन्या, धनु और मीन राशि वालों के लिए भद्र योग और वृषभ, सिंह, वृश्चिक और कुंभ राशि वालों के लिए शश योग बन रहा है। इन शुभ योग और मुहूर्त में गुरुदेव की पूजा से विशेष लाभ मिलता है।

15 जगहों पर चल रही तैयारियां

राजधानी में एक बार फिर गुरु-शिष्य परंपरा की झलक दिखाई देगी। शिष्य अपने गुरु के दर्शन कर पांव पखारेंगे। तो वहीं गुरु उन्हें आशीर्वाद देंगे। इस पावन उपलक्ष्य पर मां चामुंडा दरबार की ओर से पं रामजीवन दुबे गुरुजी के नेतृत्व में गुरुपूर्णिमा महोत्सव, नेहरू नगर स्थित ज्योतिष मठ संस्थान में आयोजित किया जाएगा। 15 से अधिक जगहों पर गुरु वंदना कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। शहर में 2500 से ज्यादा शिष्य गुरुदक्षिणा लेकर गुरुओं के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लेंगे। शिष्य अपने-अपने गुरुओं के स्थल पर पहुंचकर उन्हें उपहार भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।


पंडित विष्णु राजौरिया ने बताया कि आषाढ़ मास की पूर्णिमा को महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था, इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। महर्षि वेदव्यास ने चारों वेदों की रचना की थी। इस कारण इन्हें प्रथम गुरु का दर्जा दिया जाता है।

शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, आषाढ़ पूर्णिमा सोमवार तीन जुलाई गुरू पूर्णिमा पर सुबह 10:15 से 11:15 बजे तक शुभ मुहूर्त है। इसके बाद दोपहर 12:15 से 1:30 तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा। दोपहर के बाद शाम चार से छह बजे तक लाभ-अमृत का मुहूर्त रहेगा।

गुरु मंत्र प्राप्ति मुहूर्त

गुरु पूर्णिमा पर इंद्र योग प्रात:काल से लेकर दोपहर 12:15 बजे तक है, गुरु पूर्णिमा के दिन इस योग में जो व्यक्ति गुरु मंत्र लेता है, सर्वत्र विजयी होता है। गुरु पूर्णिमा के दिन चंद्रमा धनु राशि में रहते हैं, जिसपर बृहस्पति का शासन है। साथ ही पूवार्षाढ़ा नक्षत्र है, जिस पर इस समय शुक्र का शासन है। यही कारण है कि चंद्रमा को व्यक्ति के दिल और दिमाग का स्वामी माना जाता है। यह दिल और दिमाग के बीच का संबंध है जिसे हमारे गुरु पोषित करते हैं, जिससे हमें एक ऐसा व्यवहार विकसित करने में मदद मिलती है जो नैतिक और व्यावहारिक दोनों है।

गुरु पूर्णिमा पूजा विधि

गुरु पूर्णिमा के दिन सुबह स्नानादि से निवृत होकर शिवजी और भगवान विष्णु की पूजा करें। इसके बाद देवगुरु बृहस्पति, महर्षि वेदव्यास की पूजा करें फिर अपने गुरु का पूजन करें। उन्हें नए वस्त्र, गुरुदक्षिणा, मिष्ठान, श्रीफल इत्यादि भेंट करें और उनसे सुखद भविष्य के लिए आशीर्वाद प्राप्त करें। यदि आपके गुरुदेव ब्रह्मलीन है तो उनकी समाधि स्थल पर जाकर नमन करें, पुष्प माला अर्पित कर उनकी पूजा-अर्चना करें और आशीर्वाद प्राप्ति की कामना करें।