
भोपाल। डेंगू, चिकनगुनिया और मलेरिया के साथ ही मच्छरों से होने वाली खतरनाक बीमारी जैपनीज इंसेफेलाइटिस (जापानी बुखार) ने भी भोपाल में दस्तक दे दी है। विदिशा और छतरपुर में भी एक-एक मरीज मिले हैं। एम्स भोपाल में हुई जांच में इसकी पुष्टि हुई है। इसके साथ ही स्वास्थ्य संचालनालय ने सभी जिलों के सीएमएचओ को अलर्ट कर दिया है। निजी अस्पतालों को भी सतर्क रहने को कहा गया है।
भोपाल में मिले दोनों मरीज पुरुष हैं। एक टीलाजमापुरा और दूसरा साकेत नगर का रहने वाला है। अब उनकी हालत ठीक बताई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया जापानी बुखार एक जानलेवा बीमारी है। यह क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होती है। इससे दिमागी बुखार होता है। इंटैमोलाजिस्ट (कीटविज्ञानी) की टीम अब यह पता करने में जुटी है कि इस बीमारी के मरीज मप्र में कैसे मिले। इन मरीजों का दूसरे राज्यों में यात्रा करने का भी ब्यौरा लिया गया है। प्रभावित मरीजों के घरों में एंटी लार्वा की टीम ने दवाओं छिड़काव लार्वा सर्वे किया है। बता दें कि प्रदेश के अन्य जिलों में इसके पहले भी इस बीमारी के मरीज मिल चुके हैं।
ऐसे फैलती है ये बीमारी
क्यूसेल ट्राइटिनीओरिकंस नाम के मच्छर के काटने से ये संक्रमण फैलता है। इस प्रजाति का मच्छर चावल के खेतों में पाया जाता है। पहले से संक्रमित सुअर या पक्षी को मच्छर काटता है तब यह वायरस मच्छर में आ जाता है। यह मच्छर इंसान को काटता है तो उसे जैपनीज इंसेफेलाटिस यानि जापानी बुखार हो जाता है। यह बीमारी एक व्यक्ति दूसरे में सीधे नहीं पहुंचती।
बीमारी के लक्षण
इस बीमारी में पहले हल्के सिर दर्द के साथ हल्का बुखार आता है। संक्रमण बढ़ जाने कि स्थिति में तेज बुखार, तेज सिर दर्द, घबराहट, गर्दन में अकड़न, शरीर में ऐंठन होने लगती है। इतना ही नहीं बल्कि मानसिक निष्क्रियता और कोमा की स्थिति भी हो सकती है।
14 राज्यों में मिल चुके है मरीज
इस बीमारी के मरीज की संख्या उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक है। इसके बाद असम, पश्चिम बंगाल और बिहार में भी जापानी बुखार के मरीज सामने आ रहे हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों का मानना है कि इन्हीं प्रदेशों से आए मरीजों से संक्रमण के चार मामले सामने आए है।
दो क्षेत्रों को संवदेनशील घोषित किया
हम इन बीमारी को लेकर सक्रिय है। डेंगू और मलेरिया बीमारी के मरीजों की जांच में जैपनीस इंसेप्लाइटिस की भी जांच कराई जा रही है। टीलाजमालपुरा और साकेत में लार्वा सर्वे भी करा रहे हैं। सैम्पल कलेक्शन के लिए भी टीम लगी हुई है। यह बीमारी खतरनाक बीमारी श्रेणी में आती है। इसी कारण अतिरिक्त सक्रियता बरती जा रही है - डॉ.एमयू खान, प्रभारी सीएमएचओ, भोपाल।