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सरदार सरोवर प्रोजेक्ट पर ऐतिहासिक समझौता: 3 दशक पुराना विवाद सुलझा; एमपी को 1500 की जगह देने होंगे सिर्फ 231 करोड़ रुपये

कांग्रेस ने सरदार सरोवर परियोजना को लेकर समझौते पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग सरकार से की। पार्टी का आरोप है कि मध्य प्रदेश को गुजरात सरकार से 7,669...और पढ़ें

By Mohan KumarEdited By: Mohan Kumar
Publish Date: Thu, 09 Jul 2026 09:06:51 AM (IST)Updated Date: Thu, 09 Jul 2026 09:06:51 AM (IST)
सरदार सरोवर प्रोजेक्ट पर ऐतिहासिक समझौता: 3 दशक पुराना विवाद सुलझा; एमपी को 1500 की जगह देने होंगे सिर्फ 231 करोड़ रुपये
सरदार सरोवर परियोजना को लेकर हुआ ऐतिहासिक समझौता

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। तीन दशक से चले आ रहे सरदार सरोवर परियोजना के लंबित मामले का समाधान ऐतिहासिक समझौते से निकल गया। गुजरात अब निर्माण की 75 प्रतिशत लागत वहन करेगा। मध्य प्रदेश को केवल 231 करोड़ रुपये देने होंगे। पहले यह राशि डेढ़ हजार करोड़ रुपये आंकी गई थी। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने समझौते पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जल सुरक्षा को सुदृढ़ करने और सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की उपस्थिति में हुई बैठक में समाधान का मार्ग प्रशस्त हुआ।

भारत के अटार्नी जनरल द्वारा फरवरी 2026 में दिए गए अभिमत के अनुसार पुनर्वास व्यय में मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी 31.98 प्रतिशत निर्धारित की गई थी। इसके अनुसार प्रदेश को लगभग 1,500 करोड़ रुपये का भुगतान गुजरात को करना पड़ता। बैठक में सर्वसम्मति से मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी घटाकर 16.17 प्रतिशत निर्धारित की गई। इसके परिणामस्वरूप अब मध्य प्रदेश को केवल 231.80 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा। वहीं, गुजरात की हिस्सेदारी 50.57 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 प्रतिशत की गई है। महाराष्ट्र की 15.15 प्रतिशत से घटाकर 7.66 प्रतिशत और राजस्थान की हिस्सेदारी 2.31 प्रतिशत से घटाकर 1.17 प्रतिशत निर्धारित की गई है।


मप्र को परियोजना से मिल रहा बिजली का 57 प्रतिशत हिस्सा

मुख्यमंत्री ने बताया कि नर्मदा एवं सरदार सरोवर परियोजना से प्रदेश को उत्पादित कुल विद्युत का 57 प्रतिशत हिस्सा मिलता है। अब तक प्रदेश को लगभग 3,900 करोड़ यूनिट विद्युत औसतन 85 पैसे प्रति यूनिट की दर से उपलब्ध हुई है। इसके अतिरिक्त लगभग 31 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई सुविधा मिल रही है। साथ ही जबलपुर, कटनी, देवास, उज्जैन, इंदौर, धार सहित अनेक शहरों और पीथमपुर, देवास एवं विक्रम उद्योगपुरी जैसे औद्योगिक क्षेत्रों को नर्मदा जल की आपूर्ति भी इसी परियोजना से की जा रही है। उन्होंने कैबिनेट की बैठक से पहले मंत्रियों के साथ समझौते की जानकारी साझा की।

कांग्रेस बोली-समझौते पर श्वेत पत्र हो जारी

उधर, कांग्रेस ने सरदार सरोवर परियोजना को लेकर समझौते पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग सरकार से की। पार्टी का आरोप है कि मध्य प्रदेश को गुजरात सरकार से 7,669 करोड़ रुपये का मुआवजा लेना था लेकिन इसकी जगह 231 करोड़ रुपये देने पड़ रहे हैं। यह स्थिति क्यों बनीं, इसे लेकर प्रदेशवासियों के सामने स्थिति स्पष्ट होना चाहिए। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, राष्ट्रीय सचिव कुणाल चौधरी और पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने इसे मुद्दे को उठाते हुए कहा कि गुजरात सरकार को मध्य प्रदेश को 7,669 करोड़ रुपये का मुआवजा देना था, लेकिन अब राशि देने की बात सामने आ रही है।

कांग्रेस का झूठ व जीतू पटवारी का दुष्प्रचार ध्वस्त: आशीष

भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि सरदार सरोवर परियोजना को लेकर कांग्रेस व कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी जनता को भ्रमित कर रहे हैं। इस समझौते से उनका दुष्प्रचार ध्वस्त हो गया है। उन्होंने कांग्रेस और जीतू पटवारी से पूछा कि, क्या 1,500 करोड़ की संभावित देनदारी को घटाकर 231.80 करोड़ करना प्रदेशहित के विरुद्ध है या यह मप्र के हितों की ऐतिहासिक रक्षा है? यह निर्णय केवल आर्थिक बचत नहीं, बल्कि सहकारी संघवाद, संवाद और मजबूत नेतृत्व का उत्कृष्ट उदाहरण है।