Holi Celebration in Bhopal: 'होरी हो ब्रजराज' की लय-ताल पर थिरक उठा भोपाल
रवींद्र भवन में मुक्ताकाश मंच पर हुआ 'होरी हो ब्रजराज' का आयोजन। टैगोर विश्व कला संस्कृति केंद्र ने दिया सद्भाव का पैगाम। ...और पढ़ें
By Ravindra SoniEdited By: Ravindra Soni
Publish Date: Sun, 12 Mar 2023 04:12:15 PM (IST)Updated Date: Sun, 12 Mar 2023 04:12:15 PM (IST)

भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। आसमान से उतरती फागुनी शाम जब रंगों की पुरखुश सौगात समेट लाई तो मन का मौसम भी खिल उठा। रवींद्र भवन के खुले मंच पर 'होरी हो ब्रजराज' ने ऐसा ही समां बांधा। मुरली की तान उठी, ढोलक, मृदंग और ढप पर ताल छिड़ी, होरी के गीत गूँजे और नृत्य की अलमस्ती में हुरियारों के पांव थिरके। रंगपंचमी की पूर्वसंध्या पर लोकरंगों की गागर छलकी तो शहर के रसिकों का रेला भी उसकी आगोश में उमड़ आया।
टैगोर विश्व कला एवं संस्कृति केंद्र, रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय और पुरू कथक अकादमी की साझा पहल पर शनिवार शाम प्रेम, सद्भाव और अमन की आरज़ुओं का यह अनूठा पैगाम था। कथक नृत्यांगना क्षमा मालवीय के निर्देशन में 50 से भी ज्यादा कलाकारों ने मिलकर 'होरी हो ब्रजराज' को अंजाम दिया।
कवि-कथाकार संतोष चौबे की परिकल्पना से तैयार हुई लगभग डेढ़ घंटे की इस प्रस्तुति में ब्रज और मैनपुरी के 13 पारंपरिक होली गीतों को शामिल किया गया। इन गीतों के साथ जुड़े प्रसंगों और संगीत-नृत्य के पहलुओं को कला समीक्षक और उद्घोषक विनय उपाध्याय ने बखूबी पेश किया। प्रकाश परिकल्पना का सुंदर संयोजन वरिष्ठ रंगकर्मी अनूप जोशी बंटी ने किया। संगीत समन्वय और गायन समूह में संतोष कौशिक, राजू राव, कैलाश यादव, उमा कोरवार, आनंद भट्टाचार्य, वीरेंद्र कोरे आदि कलाकारों की भागीदारी रही।
प्रस्तुति से पहले टैगोर कला केंद्र की सांस्कृतिक पत्रिका 'रंग संवाद' के विशेषांक का लोकार्पण हुआ। यह अंक कलाओं में परम्परा, प्रयोग और नवाचार पर केंद्रित है। टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति संतोष चौबे, इलेक्ट्रानिकी की संपादक डा. विनीता चौबे, कुलसचिव डा. विजय सिंह, विश्वरंग की सहनिदेशक अदिति चतुर्वेदी वत्स तथा टैगोर विश्व कला एवं संस्कृति केन्द्र के निदेशक विनय उपाध्याय ने इस मौके पर होली की शुभकामनाएं दीं।
परंपरा के होरी गीतों ने मन मोहा
इस दौरान होरी के पारंपरिक गीतों में चलो सखी जमुना पे मची आज होरी..., यमुना तट श्याम खेलत होरी..., बरजोरी करें रंग डारी..., बहुत दिनन सों रूठे श्याम..., मैं तो तोही को ना छाडूंगी... और रंग में बोरो री... ने उपस्थित दर्शकों का मन मोहा।