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एम्स भोपाल में अब होम्योपैथी और एलोपैथी मिलकर करेंगे बीमारियों पर प्रहार, दोनों विभागों के बीच हुआ गठबंधन

विश्व होम्योपैथी दिवस के अवसर पर एम्स भोपाल ने घोषणा की है कि आधुनिक चिकित्सा के साथ होम्योपैथी का उपयोग कर एलर्जिक राइनाइटिस, प्रोस्टेट वृद्धि, किडनी...और पढ़ें

By mukesh vishwakarmaEdited By: Mohan Kumar
Publish Date: Fri, 10 Apr 2026 11:18:54 AM (IST)Updated Date: Fri, 10 Apr 2026 11:19:37 AM (IST)
एम्स भोपाल में अब होम्योपैथी और एलोपैथी मिलकर करेंगे बीमारियों पर प्रहार, दोनों विभागों के बीच हुआ गठबंधन
एम्स भोपाल में होम्योपैथी-एलोपैथी मिलकर करेंगे बीमारियों पर प्रहार (फाइल फोटो)

HighLights

  1. अब होम्योपैथी-एलोपैथी मिलकर करेंगे बीमारियों पर प्रहार
  2. सिकल सेल और फैटी लिवर पर होगा साझा शोध
  3. लाइलाज बीमारियों के लिए विभागों के बीच हुआ गठबंधन

नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) अब मरीजों को बेहतर परिणाम देने के लिए समेकित चिकित्सा (एलोपैथी और होम्योपैथी का संगम) पर जोर दे रहा है। विश्व होम्योपैथी दिवस के अवसर पर संस्थान ने घोषणा की है कि आधुनिक चिकित्सा के साथ होम्योपैथी का उपयोग कर एलर्जिक राइनाइटिस, प्रोस्टेट वृद्धि, किडनी स्टोन और सिकल सेल जैसी बीमारियों का स्थायी समाधान खोजा जा रहा है।

एम्स की होम्योपैथी इकाई ने ईएनटी और जनरल सर्जरी विभाग के साथ मिलकर एलर्जिक राइनाइटिस और एनल फिशर पर शोध किया है, जिसके सकारात्मक नतीजे मिले हैं। अब संस्थान सिकल सेल रोग, टिनिटस (कान में आवाज आना), फैटी लिवर और डायबिटिक फुट अल्सर जैसी गंभीर समस्याओं पर भी बहु-विभागीय अध्ययन शुरू करने जा रहा है।


कार्यपालक निदेशक प्रो. डा. माधवानंद कर ने बताया कि एम्स भोपाल साक्ष्य-आधारित शोध को बढ़ावा दे रहा है। जल्द ही केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के साथ एक एमओयू साइन किया जाएगा, जिससे सिकल सेल जैसी बीमारियों पर शोध को गति मिलेगी।

एंटीबायोटिक के बढ़ते खतरे को कम करेगी होम्योपैथी

माइक्रोबायोलाजी विभाग की डा. शाश्वती नेमा के अनुसार, ''एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस'' (दवाओं का असर कम होना) की चुनौती से निपटने के लिए डायबिटिक फुट संक्रमण जैसे मामलों में होम्योपैथिक दवाओं के प्रभाव का मूल्यांकन किया जा रहा है। इससे एंटीबायोटिक दवाओं पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। डा. अंजन कुमार साहू (ईएनटी) ने बताया कि होम्योपैथी और फ्लुटिकासोन के संयुक्त उपयोग से एलर्जी के मरीजों को लंबे समय तक राहत मिल रही है।

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डा. सुखेस मुखर्जी (बायोकैमिस्ट्री) और डा. केतन मेहरा (यूरोलाजी) ने बताया कि किडनी स्टोन और बार-बार होने वाले यूरिन इन्फेक्शन में होम्योपैथी सहायक साबित हो रही है। जबकि डा. आशीष कुमार दीक्षित (होम्योपैथी अधिकारी) ने बताया कि कई विभागों के साथ मिलकर एनल फिशर और डर्माटोफाइटोसिस जैसे रोगों पर शोध कार्य पूरे किए गए हैं।