
प्रशांत व्यास, नवदुनिया, भोपाल। शराब दुकान की तर्ज पर कटाराहिल्स में पुलिस की नाक के नीचे रेत-गिट्टी की दुकान की आड़ में लंबे समय से अवैध शराब बेची जा रही थी। इस काले कारोबार की शिकायतें कई बार वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचीं, लेकिन पुलिस के पहुंचने से पहले माल गायब हो जाता। पिछले दिनों जोन-2 की एडिशनल डीसीपी मिनी शुक्ला को इस अवैध शराब दुकान को पकड़ने का टास्क दिया गया। उन्होंने एसीपी उमराव सिंह के साथ गुपचुप दबिश दी।
आशंका है कि कार्रवाई की भनक पहले ही लग गई थी, जिसके चलते अधिकतर शराब छिपा दी गई और मौके से करीब 50 लीटर शराब ही बरामद हो सकी। लेकिन असली खेल उसके बाद शुरू हुआ। महिला आईपीएस अधिकारी ने बरामद शराब की जब्ती की कार्रवाई करने के निर्देश थाना पुलिस को दिए, लेकिन उनके जाने के बाद पांच लीटर शराब उड़ गई और जब्ती में सिर्फ 45 लीटर शराब ही दर्ज की गई, जिससे कम जब्ती होने से आरोपित जेल जाने से बच गया।
आखिर पांच लीटर शराब कहां गई? मामला सामने आने पर एडिशनल डीसीपी ने थाना प्रभारी को नोटिस देकर इसका हिसाब मांगा। वहीं, पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने मामले में प्राथमिक जांच के आदेश दिए हैं।
मामला कटाराहिल्स थाना क्षेत्र के झागरिया गांव का है। यहां रहने वाले रवि बंसल ने रेत-गिट्टी की दुकान की आड़ में अवैध शराब बेचने का कारोबार शुरू कर दिया था। उसकी दुकान थाने से महज एक किलोमीटर की दूरी पर है। पूरे थाना क्षेत्र में शराब की एक भी दुकान नहीं है। इसी बात का फायदा उठाकर रवि रेत-गिट्टी की दुकान की आड़ में धड़ल्ले से अवैध शराब बेच रहा था।
इस कारोबार की शिकायतें कई बार वरिष्ठ अधिकारियों तक भी पहुंची हैं, लेकिन कार्रवाई में पुलिस को सफलता नहीं मिल रही थी। सात अक्टूबर को एडिशनल डीसीपी जोन-2 मिनी शुक्ला और एसीपी उमराव सिंह ने टीम के साथ चुपचाप छापेमार कार्रवाई की और 50 लीटर से अधिक शराब पकड़ी।
मध्य प्रदेश आबकारी अधिनियम की धारा 34 के तहत शराब की मात्रा और अपराध की परिस्थितियों के आधार पर सजा का प्रावधान है। 50 लीटर से अधिक शराब की जब्ती होने पर अपराध गैर-जमानती बनता है और आरोपित को तुरंत गिरफ्तार कर जेल भेजने का नियम है। लागू उपधारा (दो) के तहत एक से तीन वर्ष तक की जेल और 25 हजार से एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
वहीं, 50 लीटर से कम मात्रा के मामलों में सामान्यतः एक वर्ष तक की जेल और पांच हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। अपराध की पुनरावृत्ति और अन्य कानूनी परिस्थितियों के अनुसार सजा अलग हो सकती है। ऐसे में बरामद शराब की वास्तविक मात्रा और जब्ती में दर्ज मात्रा ने आरोपित को फायदा पहुंचाया है।
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पांच लीटर शराब के अंतर को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों ने थाना प्रभारी और जांच अधिकारी से जवाब मांगा। नोटिस के जवाब में उन्होंने बताया कि जिन बोतलों को जब्त किया गया, उनमें शराब की मात्रा पहले से ही कम थी। इसी वजह से जब्ती में कुल मात्रा कम दर्ज हुई। हालांकि, मौके पर बरामद शराब और थाने में दर्ज जब्ती के बीच अंतर को लेकर सवाल बना हुआ है।
आरोपितों के खिलाफ मिले साक्ष्यों को मजबूती से प्रस्तुत किया जाता है, ताकि उन्हें कठोर सजा दिलाई जा सके। मामले में लापरवाही की जांच की जा रही है। - संजय कुमार, पुलिस कमिश्नर