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MP में सहकारी समितियां सरकारी अधिकारियों से होंगी मुक्त, प्रशासक बनाए जाएंगे राजनीतिक व्यक्ति

मध्य प्रदेश में कृषक कल्याण वर्ष मनाया जा रहा है। इसमें किसानों के हित में कई काम किए जा रहे हैं। अब इनसे जुड़ी संस्थाओं के चुनाव कराने की तैयारी है।

By Digital DeskEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sun, 12 Apr 2026 06:40:42 PM (IST)Updated Date: Sun, 12 Apr 2026 06:40:42 PM (IST)
MP में सहकारी समितियां सरकारी अधिकारियों से होंगी मुक्त, प्रशासक बनाए जाएंगे राजनीतिक व्यक्ति
कार्यकर्ताओं को सत्ता में मिलेगी अहम हिस्सेदारी।

HighLights

  1. कार्यकर्ताओं को सत्ता में मिलेगी अहम हिस्सेदारी
  2. सहकारिता-मंडियों में प्रशासक नियुक्त करेगी सरकार
  3. सदस्यता सूची और चुनाव की कमान होगी इनके हाथ

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। मध्य प्रदेश में कृषक कल्याण वर्ष मनाया जा रहा है। इसमें किसानों के हित में कई काम किए जा रहे हैं। अब इनसे जुड़ी संस्थाओं के चुनाव कराने की तैयारी है। चुनाव न होने के कारण वर्तमान में समितियों के कामकाज को संचालित करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रशासक नियुक्त किया गया था। अब इन्हें मुक्त करके राजनीतिक नियुक्तियां की जाएंगी।

सत्ता और संगठन की बैठकों में बनी सहमति

दरअसल, पिछले दिनों राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर सत्ता और संगठन की जो बैठकें हुईं, उनमें यह बात निकलकर सामने आई कि अब कार्यकर्ताओं को सहकारी और कृषि उपज मंडियों में समायोजित किया जाए। इसके लिए पहले मनोनयन होगा। इसकी तैयारी काफी समय से चल भी रही है लेकिन सहमति नहीं बनने के कारण मामला रुका हुआ था। प्रदेश में 4,345 सहकारी समितियों, 38 जिला सहकारी केंद्रीय बैंक और राज्य शीर्ष बैंक (अपेक्स बैंक) हैं।


कानूनी पेचीदगी और प्रशासनिक बदलाव

2018 से इनके चुनाव अलग-अलग कारणों से नहीं हुए हैं। हाई कोर्ट बार-बार चुनाव कराने को लेकर निर्देश दे रहा है। सरकार ने अवमानना से बचने के लिए अधिनियम में संशोधन करके यह प्रविधान तो कर लिया कि विशेष परिस्थितियों में चुनाव आगे बढ़ाए जा सकते हैं लेकिन अब कार्यकर्ताओं को समायोजित करने की बात है। इससे पहले राजनीतिक नियुक्तियों के क्रम में नगरीय निकायों में एल्डरमैन (मनोनीत पार्षद) नियुक्त किए जा चुके हैं। अब सबसे बड़े क्षेत्र सहकारी समितियों की बारी है।

सहकारिता नेटवर्क और चुनावी महत्व

दरअसल, पंचायत के बाद प्रदेश में इनका ही बड़ा नेटवर्क है। समितियों से लगभग 65 लाख किसान जुड़े हैं। भले ही समितियों के चुनाव राजनीतिक आधार पर नहीं होते हैं मगर इनकी भूमिका पंचायत से लेकर विधानसभा-लोकसभा के चुनाव में महत्वपूर्ण रहती है। पार्टी के पक्ष में वातावरण बनाने का दायित्व इन्हीं का रहता है।

कार्यकर्ताओं का मनोबल और चयन प्रक्रिया

लंबे समय से चुनाव न होने के कारण सहकारिता के क्षेत्र में सक्रिय कार्यकर्ता हतोत्साहित हैं। कई बार संगठन स्तर पर नियुक्ति को लेकर बात भी हो चुकी है लेकिन यह किसी न किसी कारण से टलती रही लेकिन अब राजनीतिक व्यक्तियों को प्रशासक पद पर मनोनीत करने की तैयारी है। सूत्रों का कहना है कि पहले प्राथमिक समितियों में मनोनयन होगा। इसके लिए जिला इकाइयों के साथ स्थानीय विधायकों से फीडबैक लिया जाएगा।

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प्रशासकों की देखरेख में कराए जाएंगे चुनाव

सूत्रों का कहना है कि सहकारी समितियों के चुनाव प्रशासकों की देखरेख में कराए जाएंगे। ये ही सदस्यता सूची बनवाएंगे और फिर चुनाव कराएंगे। प्रशासक उसे ही मनोनीत किया जाएगा जो समिति का सदस्य हो और चुनाव लड़ने की पात्रता रखता हो। यानी डिफाल्टर न हो। किसी प्रकार का आपराधिक रिकार्ड न हो।