डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ वैवाहिक हिंसा के मामलों में गिरावट तो दर्ज की गई है, लेकिन जमीनी हालात अब भी बेहद चिंताजनक बने हुए हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस -5 और 6) के हालिया आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में विवाहित महिलाओं के खिलाफ होने वाली वैवाहिक हिंसा में 6.6% की बड़ी गिरावट आई है ।
हालांकि, इस सुधार के पीछे एक स्याह पहलू यह है कि महिलाओं के लिए उनका अपना घर और सबसे करीबी रिश्ता ही सबसे असुरक्षित बना हुआ है।
90% से अधिक मामलों में पति ही शोषक
आंकड़ों के मुताबिक, 15 वर्ष की आयु के बाद प्रताड़ना का सामना करने वाली प्रदेश की विवाहित महिलाओं में से सबसे अधिक 90.8% महिलाओं ने हिंसा अपने पति से ही झेली है। यह स्थिति समाज की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल उठाती है।
गर्भवती महिलाओं पर भी दया नहीं
रिपोर्ट बताती है कि गर्भावस्था जैसी नाजुक स्थिति में भी महिलाओं पर रहम नहीं खाया जा रहा है। पिछले तीन सालों में इस स्थिति में कोई सुधार या बदलाव नहीं आया है और गर्भवती महिलाओं के साथ मारपीट का यह आंकड़ा आज भी 2.3% पर स्थिर बना हुआ है ।
हिंसा के आम तरीके
गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के साथ होने वाली शारीरिक क्रूरता सिर्फ धक्का-मुक्की तक सीमित नहीं है । सर्वे के अनुसार, गर्भ के दौरान प्रताड़ना के तौर-तरीके इस प्रकार हैं:
- 25% मामलों में महिलाओं को थप्पड़ मारे जाते हैं।
-12% मामलों में महिलाओं को धक्का दिया जाता है या झकझोरा जाता है।
- 11% मामलों में महिलाओं के बाल खींचे जाते हैं।
- 7% मामलों में मुक्के-लात मारकर जमीन पर घसीटा जाता है।
- 2% मामलों में गला घोंटने या जिंदा जलाने की कोशिश जैसी जानलेवा हरकतें की गईं।
घर में भी लाड़लियां की सुरक्षा पर सवाल
वैवाहिक जीवन के अलावा, अविवाहित महिलाओं और शादी के बाद मायके आने वाली युवतियों को भी अपने ही घर में शारीरिक हिंसा का सामना करना पड़ रहा है। आंकड़ों के अनुसार, महिलाओं के साथ होने वाली इस घरेलू शारीरिक हिंसा के लिए अन्य पारिवारिक सदस्य जिम्मेदार हैं:
- मां / सौतेली मां: 10.6% मामलों में जिम्मेदार।
- पिता / सौतेली पिता: 8.5% मामलों में प्रताड़ित करते हैं।
- भाई / बहन: 4.8% मामलों में हिंसा के लिए जिम्मेदार पाए गए।
ग्रामीण इलाकों में स्थित चिंताजनक
घरेलू और वैवाहिक हिंसा का स्वरूप गांवों और शहरों में अलग-अलग नजर आता है । वैवाहिक हिंसा के मामले शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण इलाकों में अधिक हैं। सर्वे के मुताबिक, मध्य प्रदेश के गांवों में 22.6% विवाहित महिलाओं ने वैवाहिक हिंसा झेलने की बात स्वीकार की है, जबकि शहरों में यह आंकड़ा 17.7% है।
शिक्षित वर्ग और हर तीसरी महिला की स्वीकारोक्ति
महिलाओं के खिलाफ हिंसा केवल एक अपराध नहीं, बल्कि सामाजिक स्वीकार्यता का एक कड़वा सच भी बन चुका है। रिपोर्ट के कुछ चौंकाने वाले पहलू इस प्रकार हैं:
- प्रदेश की 34% महिलाओं का मानना है कि कुछ विशेष परिस्थितियों में पति द्वारा पत्नी की पिटाई करना पूरी तरह जायज है।
- हैरानी की बात यह है कि 28% पुरुष भी इस हिंसक विचारधारा से पूरी तरह सहमत नजर आते हैं।
- शिक्षा भी इस सोच को पूरी तरह नहीं बदल पाई है; सर्वे के मुताबिक, 12 या उससे अधिक वर्षों तक पढ़ाई करने के बावजूद 22% महिलाएं और 20% पुरुष पत्नी की पिटाई को सही ठहराते हैं।