
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मध्य प्रदेश में निजी महाविद्यालयों में फर्जीवाड़े और अनियमितताओं पर रोक लगाने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक सत्र 2027-28 के लिए नई नियमावली जारी की है। प्रदेश में बीएड और एमबीए कॉलेजों में गड़बड़ियों के मामले सामने आने के बाद शासन के निर्देश पर नियमों को सख्त किया गया है।
नई व्यवस्था के तहत फर्जी दस्तावेज या गलत जानकारी देने पर महाविद्यालय की मान्यता रद की जाएगी। साथ ही महाविद्यालय प्रबंधन पर पांच लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जाएगा। नियमों में कॉलेज खोलने के लिए जमीन, भवन, शिक्षकों के वेतन, प्रवेश प्रक्रिया और शैक्षणिक गुणवत्ता से जुड़ी शर्तें निर्धारित की गई हैं।
बता दें, कि इस साल राजधानी के बरकतउल्ला विश्वविद्यालय से संबद्ध 30 बीएड कॉलेजों की संबद्धता को लेकर फर्जीवाड़ा का मामला सामने आया था। इसमें श्री राम महाविद्यालय 10 वर्ष से सिर्फ कागजों में संचालित हो रहा था। इसकी मान्यता व सबंद्धता रद की गई थी।
नए नियमावली में उल्लेखित है कि निजी महाविद्यालय खोलने के लिए शहरी क्षेत्र में कम से कम दो एकड़ और ग्रामीण क्षेत्र में चार एकड़ जमीन होना अनिवार्य है।महाविद्यालय परिसर में खेल मैदान नहीं होने पर भवन से दो किलोमीटर की परिधि में मैदान उपलब्ध कराना होगा।निजी महाविद्यालयों द्वारा अधिकतम पांच साल तक किराये के भवन में संचालित हो सकेंगे।
इसके लिए आवेदन की तारीख से एक माह से अधिक पुराना नहीं होने वाला, समिति के नाम पर पंजीकृत किरायानामा देना होगा। इसकी अवधि न्यूनतम तीन और अधिकतम पांच वर्ष होनी चाहिए। केवल नोटरी से सत्यापित किरायानामा मान्य नहीं होगा। पांच साल में खुद का भवन नहीं बनाने पर किराये के भवन में संचालन की अनुमति स्वतः निरस्त मानी जाएगी।
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पहले से संचालित कालेजों में नए विषय शुरू करने, शिक्षकों के वेतन भुगतान और विद्यार्थियों के प्रवेश पर निगरानी बढ़ाई जाएगी। प्रबंधन को शिक्षकों के वेतन भुगतान के प्रमाण, प्रमाण पत्रों की सत्यापित प्रतियां और बैंक रिकार्ड प्रस्तुत करने होंगे। परिसर की ऐसी तस्वीरें भी जमा करनी होंगी, जिनमें स्थान की जानकारी दर्ज हो। छह साल से अधिक पुराने निजी महाविद्यालयों को आगामी दो शैक्षणिक सत्रों में नैक ग्रेडिंग करानी होगी।
महाविद्यालयों को सरकारी अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) और विश्वविद्यालय से संबद्धता मिलने के बाद ही ऑनलाइन प्रवेश की अनुमति मिलेगी। अनुमति मिलने के एक महीने के भीतर किताबों, प्रयोगशाला उपकरणों और स्टाफ की जानकारी देनी होगी। निर्धारित शुल्क जमा होने के बाद ही पोर्टल पर संबंधित विषय प्रदर्शित होंगे।
बिना अनुमति विद्यार्थियों को प्रवेश देने पर फीस जब्त करने के साथ महाविद्यालय को ब्लैकलिस्ट किया जा सकेगा। इसके अलावा, महाविद्यालय निर्धारित शुल्क से अधिक राशि विद्यार्थियों से नहीं वसूल सकेंगे।