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नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत मध्य प्रदेश में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा लगातार बढ़ रहा है। प्रदेश में अब तक 5 करोड़ 85 लाख 23 हजार 788 आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (आभा) बनाए जा चुके हैं। जून माह में ही 4 लाख 42 हजार 72 नए आभा खाते बनाए गए, जबकि एक दिन में 10,013 नए खाते पंजीकृत हुए।
2.63 करोड़ से अधिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड हुए डिजिटल लिंक
राज्य में मरीजों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने का कार्य भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। अब तक 2 करोड़ 63 लाख 4 हजार 887 स्वास्थ्य रिकॉर्ड लिंक किए जा चुके हैं। जून माह के दौरान 5 लाख 24 हजार 114 नए रिकॉर्ड जुड़े, जबकि 29 जून को 12,271 रिकॉर्ड लिंक किए गए।
20 हजार से अधिक स्वास्थ्य संस्थानों का सत्यापन
डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 20,014 स्वास्थ्य संस्थानों का हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री (एचएफआर) में सत्यापन किया जा चुका है। जून में 668 नई स्वास्थ्य सुविधाएं पंजीकृत हुईं। वहीं 18,022 स्वास्थ्य पेशेवरों का भी सत्यापन पूरा हो चुका है। जून में 141 स्वास्थ्य पेशेवर और 29 जून को 14 नए पेशेवर इस प्लेटफॉर्म से जुड़े।
आभा बनाने में इंदौर सबसे आगे
आभा अकाउंट बनाने में इंदौर (25.4 लाख) पहले स्थान पर है। इसके बाद भोपाल (18.4 लाख), सागर (18.3 लाख), छिंदवाड़ा (18.3 लाख) और धार (17.7 लाख) का स्थान है।
स्वास्थ्य संस्थानों और पेशेवरों के सत्यापन में भी इंदौर-भोपाल आगे
स्वास्थ्य संस्थानों के सत्यापन में इंदौर (1,185) पहले और भोपाल (1,172) दूसरे स्थान पर हैं। इसके बाद ग्वालियर (1,020), सीहोर (997) और जबलपुर (724) शामिल हैं। वहीं सत्यापित स्वास्थ्य पेशेवरों में भोपाल (3,714) पहले, इंदौर (1,921) दूसरे, ग्वालियर (1,873) तीसरे, जबलपुर (1,107) चौथे और उज्जैन (947) पांचवें स्थान पर है।
पुरुष और महिलाओं की भागीदारी लगभग बराबर
आभा अकाउंट बनाने वालों में 50.29 प्रतिशत पुरुष, 49.70 प्रतिशत महिलाएं और 0.01 प्रतिशत से भी कम अन्य श्रेणी के लोग शामिल हैं।
इन योजनाओं के तहत सबसे ज्यादा बने आभा खाते
सबसे अधिक 3 करोड़ 81 लाख 94 हजार 258 आभा खाते प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के माध्यम से बनाए गए। इसके अलावा महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के जरिए 69 लाख 99 हजार 568, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के माध्यम से 66 लाख 27 हजार 197 तथा राष्ट्रीय गैर-संचारी रोग कार्यक्रम के तहत 32 लाख 85 हजार 70 खाते बनाए गए।