राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल । नदियों का मायका, प्रचुर वन संपदा, लगभग दो करोड़ हेक्टेयर कृषि क्षेत्र वाला मध्य प्रदेश किसी जमाने में बीमारू राज्य कहलाता था। राजनीतिक इच्छा शक्ति, बिजली, पानी की उपलब्धता और नीति-नीयत के कारण कृषि प्रदेश बना।
पंजाब, हरियाणा जैसे राज्यों को पीछे छोड़कर 7 बार लगातार कृषि कर्मण पुरस्कार जीते। देश को भावांतर जैसी योजना दी, लेकिन अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए यह पर्याप्त नहीं, इसलिए कृषि के साथ औद्योगिक विकास को प्राथमिकता में लिया गया।
नकदी फसलों को बढ़ावा
सड़क, बिजली, पानी और सुशासन के चलते आज यह निवेशकों की पसंद बन रहा है। पिछले तीन वर्षों में निवेश बढ़ाने के जो प्रयास हुए हैं, उसकी बदौलत 12 लाख करोड़ का निवेश जमीन पर उतरा है। 6 लाख लोगों के लिए रोजगार के अवसर बने।
परंपरागत खेती की जगह नकदी फसलों के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि उनकी आय बढ़े। साथ ही खेती को पशुपालन को जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त बनाने की कार्य योजना भी तैयार की गई है। यद्यपि, चुनौतियां भी कम नहीं हैं।
उद्यानिकी फसलों को प्रोत्साहन
समय पर खाद-बीज की उपलब्धता, निर्बाध विद्युत आपूर्ति के साथ उपज बिक्री के लिए बाजार की व्यवस्था भी आवश्यक है।मध्य प्रदेश की 67 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है। जोत छोटी है। खेती की लागत दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। इसे समझते हुए प्रदेश में परंपरागत कृषि के साथ-साथ उद्यानिकी फसलों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
टमाटर, मटर, प्याज, फूलगोभी, ककड़ी, मिर्च, आम, अमरूद, केला, संतरा, पपीता जैसी फसल लेने के लिए किसानों को बीज उपलब्ध कराने से लेकर अन्य सुविधाएं दी जा रही हैं। खाद्य प्रसंस्करण पर फोकस किया जा रहा है, ताकि उपज के बेहतर दाम मिल सके।
दुग्ध उत्पादन पर फोकस
दुग्ध उत्पादन और गोपालन के लिए भी किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि आय में वृद्धि हो। प्रति लीटर पांच रुपये प्रोत्साहन राशि देने के साथ गोसंरक्षण के लिए गोशालाओं को चारा के लिए 40 रुपये तक अनुदान देने का प्रविधान किया गया है।
औद्योगिक विकास से खुली रोजगार की राह
बीते तीन वर्षों की बात करें तो सरकार ने निवेश बढ़ाने को प्राथमिकता में लिया। जो कभी बिजली, सड़क प्रदेश की कमजोरी थी, उसे शक्ति बनाया। पहली बार संभागीय मुख्यालयों पर जाकर मुख्यमंत्री ने सम्मेलन किए।
देशभर में निवेशकों के साथ राउंड टेबल मीटिंग करके प्रदेश में उपलब्ध संभावनाओं के बारे में बताया। 11 उद्योग मित्र नई नीतियां बनाईं। 8 नीतियां और लाई जा रही हैं। जिन अनुमतियों के लिए उद्यमियों को चक्कर लगाने पड़ते थे, वे ऑनलाइन मिलने लगीं।
ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस) की गई, जिसमें 33 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले। इनमें से 12 लाख करोड़ रुपये का निवेश धरातल पर उतर गया।
इससे 6 लाख से अधिक रोजगार के अवसर बने। फेडेरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन की ताजा रिपोर्ट के अनुसार राज्य का कुल निर्यात 66,218 करोड़ रुपये हो गया।
इसमें फार्मास्यूटिकल का निर्यात 11,968 करोड़, एनिमल फीड 6,062 करोड़, एल्युमिनियम 4,795 करोड़ और मशीनरी 5,497 करोड़ रुपये का रहा। फरवरी 2027 में फिर जीआईएस की तैयारी है।