
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश के नगरीय निकायों में खरीदी के नाम पर बड़ी गड़बड़ी की बात सामने आई है। यह खुलासा किसी बाहरी ऑडिट से नहीं, बल्कि खुद नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा गवर्नमेंट ई-मार्केट प्लेस यानी जीईएम पोर्टल के माध्यम से हुई खरीद के विश्लेषण से हुआ है।
जांच में सामने आया है कि कहीं कचरा वाहन दो लाख रुपये में खरीदा गया तो कहीं उसी वाहन में चार डस्टबिन लगाकर कीमत छह लाख रुपये कर दी गई। इस मामले में विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने अधिकारियों को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि किसने किस दर पर क्या खरीदा है, इसका पूरा रिकॉर्ड हमारे पास है। कोई यह न समझे कि वह हमारी नजरों से बच गया है।
यह मामला पिछले सप्ताह भोपाल के भौंरी स्थित सुंदरलाल पटवा शहरी विकास प्रशिक्षण संस्थान में हुई बैठक में उठा था। बैठक में प्रदेश के सभी नगरीय निकायों के मुख्य नगर पालिका अधिकारी, संचालक और विभागीय अधिकारी मौजूद थे।
इस दौरान अपर मुख्य सचिव ने कहा कि अतिरिक्त सामान के नाम पर कीमत कई गुना बढ़ाई जा रही है। कुछ निकाय तो ऐसे हैं, जिन्होंने करोड़ों रुपये के कचरा वाहन खरीद लिए, जबकि उनके पास वाहन चलाने के लिए उतने वार्ड ही नहीं हैं। यह सीधे तौर पर संसाधनों का दुरुपयोग है।
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विभाग के आंकड़ों के अनुसार, तीन साल में प्रदेश के 374 नगरीय निकायों ने जीईएम पोर्टल के माध्यम से करीब 1,134 करोड़ रुपये की खरीदी की है। राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम के अपर संचालक अंशुमन राज ने पोर्टल के जरिए हुई खरीदी के आंकड़े और उनका विश्लेषण प्रस्तुत किया। विश्लेषण में सामने आया कि यदि सामान की खरीदी औसत दरों पर की जाती, तो दो से ढाई सौ करोड़ रुपये बचाए जा सकते थे।
एक ही तरह के सामान की खरीदी में भी कीमतों का भारी अंतर मिला। कहीं एलईडी लाइट 306 रुपये में खरीदी गई तो कहीं उसी लाइट के लिए 11,800 रुपये चुकाए गए। सभी अधिकारियों को गड़बड़ियों पर अंकुश लगाने के निर्देश दिए गए हैं।