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राजधानी के भविष्य को लेकर मंथन: राज्य वित्त आयोग की बैठक में गूंजा मास्टर प्लान का मुद्दा; 36 ग्राम पंचायतों के लिए बनेगा अलग राजस्व मॉडल

राज्य वित्त आयोग की बैठक में जनप्रतिनिधियों ने कहा कि बिना मास्टर प्लान के शहर और उससे जुड़े ग्रामीण क्षेत्रों का संतुलित विकास संभव नहीं है। राजधानी ...और पढ़ें

By Madanmohan malviyaEdited By: bhupendra Singh Rajput
Publish Date: Thu, 25 Jun 2026 11:13:31 AM (IST)Updated Date: Thu, 25 Jun 2026 11:14:09 AM (IST)
राजधानी के भविष्य को लेकर मंथन: राज्य वित्त आयोग की बैठक में गूंजा मास्टर प्लान का मुद्दा; 36 ग्राम पंचायतों के लिए बनेगा अलग राजस्व मॉडल
संभागीय समीक्षा बैठक में विकास के मुद्दे पर हुआ मंथन। सौ-आयोजक

HighLights

  1. जनप्रतिनिधियों ने कहा कि भोपाल और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के संतुलित विकास के लिए एकीकृत मास्टर प्लान जरूरी है
  2. बड़ा तालाब के 50 मीटर दायरे में अतिक्रमण रोकने और पर्यटन विकास के लिए 300 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज की मांग
  3. ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों के राजस्व बढ़ाने, संपत्ति कर संग्रह और नए राजस्व मॉडल विकसित करने के सुझाव दिए गए

नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। राजधानी के भविष्य को लेकर बुधवार को आयोजित राज्य वित्त आयोग की बैठक में जनप्रतिनिधियों ने कहा कि बिना मास्टर प्लान के शहर और उससे जुड़े ग्रामीण क्षेत्रों का संतुलित विकास संभव नहीं है। तेजी से बढ़ते शहरीकरण, आधारभूत ढांचे की बढ़ती जरूरतों और पर्यावरणीय चुनौतियों को देखते हुए भोपाल के लिए नया विकास रोडमैप तैयार करना समय की आवश्यकता है।

बैठक में बड़ा तालाब संरक्षण, पर्यटन विकास, स्थानीय निकायों की वित्तीय मजबूती और ग्राम पंचायतों के राजस्व बढ़ाने जैसे मुद्दे उठाए गए। लालघाटी स्थित वीआइपी गेस्ट हाउस में आयोजित बैठक की अध्यक्षता राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया ने की। उन्होंने कहा कि स्थानीय संस्थाओं की वित्तीय मजबूती से ही बेहतर नागरिक सुविधाएं और सतत विकास सुनिश्चित हो सकेगा।


योजनाबद्ध विकास से संवरेगा भविष्य

बैठक में बैरसिया विधायक विष्णु खत्री ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए एकीकृत मास्टर प्लान तैयार करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि गांवों में स्कूल, पंचायत भवन, आंगनबाड़ी, सामुदायिक भवन और अन्य सार्वजनिक संस्थानों के लिए पहले से भूमि आरक्षित की जानी चाहिए।

योजनाबद्ध विकास से भविष्य में अतिक्रमण, अव्यवस्थित विस्तार और संसाधनों पर बढ़ते दबाव जैसी समस्याओं से बचा जा सकेगा। वे बोले, ग्रामीण पेयजल व्यवस्था गर्मी में अक्सर प्रभावित हो जाती हैं, इसलिए समूह पेयजल योजनाओं को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। सार्वजनिक परिवहन, सामुदायिक हाल और सामाजिक अधोसंरचना का विकास किया जाना चाहिए।

बड़ा तालाब संरक्षण और पर्यटन विकास पर फोकस

सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि भोपाल की पहचान बड़ा तालाब की एफटीएल (फुल टैंक लेवल) से 50 मीटर दायरे में हो रहे अतिक्रमणों पर तत्काल रोक लगाई जानी चाहिए। साथ ही पर्यटन विकास के लिए 300 करोड़ रुपये का विशेष पैकेज दिया जाए। उन्होंने यूनियन कार्बाइड परिसर में औद्योगिक विरासत संग्रहालय विकसित करने, शहर में फ्लायओवर निर्माण और पर्यटन स्थलों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने की बात कही।

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निकायों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने पर जोर

प्रभारी मंत्री चैतन्य काश्यप ने मुद्रांक शुल्क पर अधिरोपित उपकर का लाभ सीधे नगरीय निकायों को देने और शासकीय भवनों से भी संपत्ति कर वसूली सुनिश्चित करने का सुझाव दिया। जिला पंचायत उपाध्यक्ष मोहन सिंह जाट ने पंचायत क्षेत्रों में संचालित होटल, रिसोर्ट, ढाबा, वेयरहाउस और मैरिज गार्डन जैसी व्यावसायिक गतिविधियों से कर संग्रह बढ़ाने की बात कही।

36 ग्राम पंचायतों का विकसित किया जाए राजस्व मॉडल

बैठक में राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया ने कहा कि गांवों और शहरों के बीच वित्तीय संसाधनों के व्यावहारिक व न्यायसंगत बंटवारे के लिए नई नीतियां तैयार की जा रही हैं। कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने शहरीकरण की ओर बढ़ रही 36 ग्राम पंचायतों के लिए अलग राजस्व मॉडल विकसित करने का सुझाव दिया। जबकि जिला पंचायत सीईओ इला तिवारी ने ‘टैक्स सखी’ मॉडल और पंचायत परिसंपत्तियों की जीआईएस टैगिंग को राजस्व बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बताया।