MP JNNURM: ₹1500 करोड़ से बने गरीबों के आशियाने डेढ़ दशक में खस्ताहाल; मेंटेनेंस फंड पर नगर निगमों ने खींचे हाथ
मध्य प्रदेश में शहरी गरीबों के लिए बनाई गईं हजारों आवासीय इकाइयों की हालत खराब हो रही है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में ऐसे 20 हजार से अधिक फ्लैट हैं।
Publish Date: Sat, 10 Oct 2026 11:48:25 AM (IST)Updated Date: Sat, 10 Oct 2026 11:48:25 AM (IST)
फाइल फोटो।HighLights
- डेढ़ दशक में जर्जर होने लगीं जेएनएनयूआरएम की इमारतें
- नगर निगमों का तर्क- मेंटेनेंस के लिए अलग फंड नहीं
- इमारतों के रखरखाव की जिम्मेदारी को लेकर विभागों में असमंजस
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल । जवाहरलाल नेहरू शहरी नवीनीकरण मिशन (जेएनएनयूआरएम) के तहत मध्य प्रदेश के शहरों को झुग्गी मुक्त करने के लिए बनाई गई सैकडों इमारतें डेढ़ दशक में ही जर्जर हो रही हैं।
झुग्गी-झोपड़ी में रहने वालों को बेहतर जीवन स्तर प्रदान करने के लिए शुरू की गई इस योजना को बाद में भले ही प्रधानमंत्री आवास योजना से जोड़ दिया गया है लेकिन पुरानी इमारतों के रखरखाव की प्रदेश में व्यवस्था नहीं है।
इंदौर में हुआ हादसा
पिछले दिनों इंदौर में चार मंजिला इमारत धंसने लगी, यही हाल अन्य इमारतों का भी है। भूरी टेकरी और विदुर नगर आदि क्षेत्रों में 1500 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बने ये आवास 10-12 साल में ही जर्जर हो चुके हैं।
यही हाल भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में इस प्रोजेक्ट की इमारतों के भी हैं।
प्रदेशभर में 20 हजार फ्लैट
जेएनएनयूआरएम के तहत वर्ष 2009 में शहर में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए आवास योजना लाई गई। इसके तहत करीब पांच हजार आवासीय इकाइयां बनाई गईं। वर्ष 2015 में लोगों को इन फ्लैटों में शिफ्ट कर दिया गया लेकिन रखरखाव नहीं होने से ये इमारतें जर्जर हो गईं। पूरे प्रदेश में ऐसे 20 हजार से अधिक फ्लैट हैं।
रखरखाव पर असमंजस
दरअसल, यह योजना बंद होने के बाद इन बहुमंजिला इमारतों के मेंटेनेंस की जिम्मेदारी को लेकर विभागों में खींचतान मची हुई है। नगर निगमों का तर्क है कि उनके पास इन भवनों के नियमित मेंटेनेंस, लिफ्ट संचालन (जहां उपलब्ध है) और वाटर पंप सुधारने के लिए अलग से कोई फंड नहीं है।
सरकार की योजना के अनुसार आंतरिक रखरखाव के लिए रहवासी सोसाइटियां बनाई जानी थीं लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के निवासी मासिक मेंटेनेंस शुल्क देने में असमर्थ रहे, जिससे यह व्यवस्था भी विफल हो गई।
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