
दक्षा वैदकर, भोपाल। नामीबिया से चीते लाकर देश में बसाने की केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल को सभी ने सराहा है। इसे देखते हुए विस्थापित कश्मीरी पंडितों की उम्मीदें भी बढ़ गई हैं। भोपाल के कोलार क्षेत्र के दानिश कुंज में रहने वाले विस्थापित कश्मीरी पंडित अनिल भट्ट ने उन्हें एक भावुक पत्र लिखा है। इसके साथ ही ओडियो व वीडियो के जरिए भी अपना संदेश इंटरनेट मीडिया पर डाला है। इन तीनों ही माध्यमों के जरिए उन्होंने कहा, 'आदरणीय प्रधानमंत्री जी, आपने देश से विलुप्त हुए चीतों को फिर से बसाने के लिए सराहनीय पहल की। नामीबिया से चीते मंगवाए और उन्हें भारत में बसाया। इसके लिए हम आपके आभारी हैं। जिस तरह आपने चीतों को विदेश से लाकर बसाया, उसी तरह हम कश्मीरी पंडितों को हमारे कश्मीर के घर, हमारी जमीन पर वापस बसा दीजिए। आप ही ये कर सकते हैं। 'चीता मित्र' की तरह कश्मीर में हमारी सुरक्षा के लिए 'कश्मीरी पंडित मित्र' बनवाएं।' उन्होंने लिखा है, 'मैंने 20 साल घाटी में बिताए हैं। मेरे खून में कश्मीर है। मैं अपनी जन्मभूमि से बहुत प्यार करता हूं और अपने घर वापस जाना चाहता हूं, इसलिए आपको खत लिख रहा हूं।'
हमारे प्रति भी संवेदना दिखाएं
नईदुनिया से बातचीत में अनिल भट्ट बताते हैं, कश्मीर घाटी के बारामूला जिले के बुरन पटन गांव में मेरा परिवार रहता था। तीन मंजिला घर था। सेब (सेवफल) का बगीचा था। एक पूरा पहाड़ था, जिस पर चेरी, बादाम के खेत थे। जनवरी 1990 में यह सब छोड़कर ट्रक में छिपकर भागना पड़ा। किस्मत भोपाल ले आई। अब यहां घर-घर जाकर दूध बेच रहा हूं। आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। जैसे-तैसे घर चल रहा है। मेरी ही तरह कई कश्मीरी पंडित हैं, जिन्होंने अपना घर मजबूरी में छोड़ा और वापस वहां जाना चाहते हैं। हम विस्थापित कश्मीरियों को आज भी सपने में हमारा वही पुराना घर, वही वादियां दिखाई देती हैं। मोदी जी ने जानवरों के प्रति इतनी संवेदना दिखाई है। हम कश्मीरी पंडितों की भावनाओं को भी समझें और हमारी गुहार सुनें। हमें सुरक्षा मुहैया करा कर वहां वापस बसाएं। 'द कश्मीर फाइल्स' फिल्म ने हमारे दर्द को आवाज दी थी। हमें लगा था कि अब हमारी घर वापसी का द्वार खुलेगा, लेकिन मामला ठंडा हो गया।
भोपाल में रह रहे कश्मीरी पंडित की प्रधानमंत्री से गुहार.. चीतों की तरह हमें भी बसाएं https://t.co/riONbrquyG#pmnarendramodi #KashmiriPandits #MadhyaPradesh pic.twitter.com/QidNJIACFt
— NaiDunia (@Nai_Dunia) September 24, 2022


श्रीनगर के पास स्थित हमारे गांव में खीर भवानी का मंदिर था। दूर-दूर से लोग दर्शन करने आते थे। आज 30 साल से ज्यादा हो गए, हमारी वहां जाने की हिम्मत नहीं हुई। दहशत अब भी बरकरार है। जो कश्मीरी पंडित वहां जाना चाहते हैं, उनके लिए पहल हो। - रवींद्र कौल, सेवानिवृत्त डीजीएम, नागरिक आपूर्ति निगम
अब तक मोदी जी ने कश्मीरी पंडितों के लिए जितना किया है, उतना पहले किसी ने नहीं किया है। उन्होंने धारा 370 हटाई है। और भी कई बदलाव किए हैं। ये प्रयास 'द कश्मीर फाइल्स' फिल्म बनने के बहुत पहले से हो रहे हैं। इसलिए उनसे कश्मीरी पंडितों की उम्मीदें बढ़ी हुई हैं। - प्राण भट्ट, चूना भट्टी