Khandwa News: खंडवा। पैसों के लालच में नाबालिग बेटी को बेचने के मामले में नया मोड़ सामने आया है। माता-पिता और आरोपितों को जेल होने के बाद बाल कल्याण समिति द्वारा नाबालिग को परिवार के सुपुर्द कर दिया गया था। इस बीच नाबालिग को एक बार फिर महाराष्ट्र में बेचने की सूचना मिली। बाल कल्याण समिति ने नाबालिग से संपर्क किया तो उसने कहा मैं परिवार में असुरक्षित महसूस कर रही हूं। इसके बाद उसे संरक्षण में लेकर वन स्टाप सेंटर में अस्थायी रूप से आश्रय दे दिया गया है। यहां से काउंसलिंग के बाद उसे इंदौर के बालिका गृह में भेजा जाएगा।

ग्राम टिगरियां में रहने वाले माता-पिता द्वारा नाबालिग बच्ची का सौदा दो लाख रुपये में रतलाम के ओमप्रकाश से किया था। 50 हजार रुपये रुपये एडवांस लेकर 12-13 फरवरी को आरोपित ओमप्रकाश के परिवार में नाबलिग को सौंप आए था। तय हुआ था कि विवाह के समय बचे हुए डेढ़ लाख रुपये भी माता-पिता को दे दिए जाएंगे। इसी दौरान गांव के किसी व्यक्ति ने चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर काल करके नाबालिग को बेचे जाने की सूचना दी थी। इस सूचना के आधार पर चाइल्ड लाइन टीम और बाल कल्याण समिति सदस्यों ने जानकारी जुटाई। पहले सदस्यों ने रिश्तेदार के घर बालिका के होने की बात कहते हुए गुमराह किया था।

बाल कल्याण समिति के सदस्यों ने रतलाम चाइल्ड लाइन टीम से संपर्क करके ओमप्रकाश के घर नाबालिग के होने की जानकारी निकाली। इसके बाद 19-20 फरवरी को रतलाम से नाबालिग को रेस्क्यू कर खंडवा लाया गया। स्वजनों के कथन व नाबालिग के बयान के आधार पर 9 मार्च को कोतवाली पुलिस ने नाबालिग के माता-पिता, दो बिचौलियों व नाबालिग का सौदा करने वाले ओमप्रकाश तथा उसके पिता पर मामला दर्ज किया था। सभी की गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था।

फिर सौदा करने की तैयारी

माता-पिता के जेल जाने के बाद नाबालिग का पारिवारिक पुनर्वास बाल कल्याण समिति द्वारा कर दिया गया था। परिवार में नाबालिग के पहुंचते ही उसे दोबारा बेचने की तैयारी चल रही थी। बाल कल्याण समिति के सदस्य नारायण बाहेती ने बताया कि इसकी गुप्त सूचना मिलने पर शनिवार को नाबालिग को संरक्षण में ले लिया गया था। नाबालिग ने कहा कि मैं परिवार में सुरक्षित महसूस नहीं कर रही हूं। ऐसे में उसे जिला अस्पताल स्थित वन स्टाप सेंटर में अस्थायी तौर पर रखा गया है। यहां काउंसलिंग की जा रही है। नाबालिग को इंदौर के बालिका गृह में भेजा जाएगा।

Posted By: Prashant Pandey

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