भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। खरगोन में हुए दंगों को लेकर कांग्रेस और भाजपा के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्‍यारोप का दौर जारी है। कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता और पूर्व मुख्‍यमंत्री खरगोन हिंसा के संदर्भ में ट्विटर पर गलत वीडियो पोस्‍ट कर फंस चुके हैं। भाजपा नेताओं ने उन पर सांप्रदायिक उन्‍माद फैलाने का आरोप लगाया और उनके खिलाफ कई जगह थानों में एफआइआर दर्ज हो चुकी हैं। वहीं दिग्‍विजय भी इस मामले में शिवराज सरकार के खिलाफ लगातार हमलावर हैं। हाल ही में उन्‍होंने ट्वीट करते हुए दंगे रोकने में विफलता को लेकर सीएम शिवराज सिंह चौहान पर सवाल उठाया। उन्‍होंने ट्वीट करते हुए लिखा कि जिस ज़िले में दंगा होगा उसकी पूरी जवाबदेही ज़िला कलेक्टर व एसपी की होगी, यदि यह संदेश मुख्यमंत्री दे दें तो कभी दंगा नहीं हो सकता। इसके साथ ही दिग्‍विजय ने प्रदेश में अपने मुख्‍यमंत्रित्‍व काल का हवाला दिया और लिखा कि मेरे 10 वर्षों के कार्यकाल में एक भी सांप्रदायिक दंगा नहीं हुआ।

दिग्‍विजय यहीं नहीं रुके। उन्‍होंने शिवराज सरकार और भाजपा की मंशा पर सवाल उठाते हुए अगला ट्वीट किया कि भाजपा यह जानती है कि बिना पत्थर उछाले कुर्सी नहीं मिलती है। इसलिए हथियार के रूप में कभी जज़्बात को तो कभी जान को हथियार बनाती है। साम्प्रदायिक उन्माद भाजपा का सबसे ख़तरनाक राजनीतिक हथियार है।

उनके इस ट्वीट पर भाजपा विधायक रामेश्‍वर शर्मा ने तीखा पलटवार किया। उन्‍होंने दिग्‍विजय सिंह को उनके शासनकाल की याद दिलाई और ट्विटर पर लिखा कि राजा साहब, आज यदि बाबर जिंदा होता तो 10 साल के शासन को सलाम करता। इसके साथ ही उन्‍होंने दिग्‍विजय से पूछा कि "सिमी" का लालन पोषण किसने किया? "नक्सलवाद" को संरक्षण किसने दिया? चंबल में डाकुओं का राज था। कुएं हथियार उगलते थे। जिंदा जला देने की घटना भी हमे याद है। मुलताई में 24 किसानों का नरसंहार भी हम नही भूले। उन्‍होंने आगे कहा कि वास्‍तव में दिग्‍विजय सिंह जी का शासन बाबर-औरंगजेब सरीखा था।

Posted By: Ravindra Soni

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