• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • AI बूटकैंप
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • गणेशोत्‍सव 2026
  • हनुमान अंश
  • Mutual Funds मास्टरी
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • मानसून
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • भोपाल

MP में मानसून की बेरुखी से फसलों पर संकट: 19% कम बारिश, सूखने लगीं धान की क्यारियां

5 अगस्त तक मध्य प्रदेश में सामान्य 19.97 इंच के मुकाबले केवल 16.27 इंच वर्षा दर्ज की गई है। ऐसे में खरीफ फसलों पर संकट गहरा गया है।

By Digital DeskEdited By: bhupendra Singh Rajput
Publish Date: Thu, 06 Aug 2026 11:39:51 AM (IST)Updated Date: Thu, 06 Aug 2026 11:39:51 AM (IST)
MP में मानसून की बेरुखी से फसलों पर संकट: 19% कम बारिश, सूखने लगीं धान की क्यारियां
फोटो एआई से तैयार की गई है।

HighLights

  1. मध्य प्रदेश में सामान्य 19.97 इंच के मुकाबले केवल 16.27 इंच वर्षा दर्ज
  2. धान की क्यारियाँ सूखने लगीं और किसान ट्यूबवेल से सिंचाई करने को मजबूर
  3. दाना बनने की प्रक्रिया प्रभावित होने से उत्पादन कम हो सकता है

डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की रफ्तार सुस्त पड़ने के कारण खरीफ फसलों पर संकट के बादल गहराने लगे हैं। 5 अगस्त तक प्रदेश भर में औसतन 16.27 इंच बारिश हुई है, जबकि इस अवधि तक 19.97 इंच बारिश होनी चाहिए थी।

इस तरह राज्य में अब तक सामान्य से 19% कम बारिश दर्ज की गई है। बारिश की इस बेरुखी के चलते खेतों में खड़ी धान, सोयाबीन और मक्का की फसलों का उत्पादन प्रभावित होने की गंभीर आशंका बन गई है।


पूर्वी मप्र में स्थिति चिंताजनक, 22% की गिरावट

प्रदेश के सबसे बड़े धान उत्पादक क्षेत्र यानी पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश का अंतर सर्वाधिक देखा जा रहा है। यहाँ सामान्य 21.90 इंच वर्षा के मुकाबले अब तक महज 17.02 इंच बारिश ही दर्ज हुई है, जो कि 22% कम है।

वहीं, पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी सामान्य से 15% कम पानी बरसा है। राजधानी भोपाल में 22.68 इंच के सामान्य आंकड़े के मुकाबले 21.87 इंच बारिश दर्ज की जा चुकी है।

खेतों में सूखने लगीं क्यारियाँ, ट्यूबवेल बने सहारा

पानी न मिलने के कारण धान की क्यारियाँ सूखने लगी हैं। राजधानी के कोलार क्षेत्र समेत कई इलाकों में खेतों की हालत बिगड़ने लगी है। बारिश का इंतजार लंबा होता देख कई किसानों ने ट्यूबवेल से खेतों में पानी भरकर बोवनी और फसलों की रोपाई शुरू की है।

यह भी पढ़ें- एमपी के 8 हजार किसानों को मिली सौगात, खाते में ट्रांसफर हुए ₹107.72 करोड़, 188 गांवों के अन्नदाताओं को मिला मुआवजा

सोयाबीन-मक्का का उत्पादन घटने का खतरा

विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून में 'ड्राई स्पेल' (लंबे समय तक सूखा रहने) का फसलों की शारीरिक संरचना पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। पानी की कमी से धान में 'टिलरिंग' (पौधों के फुटाव) की प्रक्रिया प्रभावित होती है।

वहीं, सोयाबीन में फूल और फलियां झड़ने की समस्या उत्पन्न हो जाती है और मक्का में दाना बनने की प्रक्रिया काफी कमजोर पड़ जाती है, जिससे इस बार उत्पादन में कमी आने के पूरे आसार हैं।