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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 22, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Kuno Palpur National park: चिंटू और मिंटू की कहानी चीता की सुरक्षा में ढाल का काम करेगी

मध्‍य प्रदेश के श्योपुर के कूनो पालपुर नेशनल पार्क में अफ्रीकी चीता की सुरक्षा को लेकर नई कवायद की जा रही है।

By Hemant Kumar UpadhyayEdited By: Hemant Kumar Upadhyay
Publish Date: Thu, 22 Jul 2021 08:28:35 PM (IST)Updated Date: Thu, 22 Jul 2021 08:28:35 PM (IST)
Kuno Palpur National park: चिंटू और मिंटू की कहानी चीता की सुरक्षा में ढाल का काम करेगी

Kuno Palpur National park मनोज तिवारी, भोपाल(नवदुनिया स्टेट ब्यूरो)। श्योपुर के कूनो पालपुर नेशनल पार्क में अफ्रीकी चीता तो नवंबर में आएगा, पर उसके दुनिया का सबसे तेज दौड़ने वाला प्राणी और शिकार में चंट (माहिर) होने की कहानियां अभी से गांवों में पहुंच गईं। इन कहानियों ने ग्रामीणों की खुद और मवेशियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। जब यही चिंता लेकर ग्रामीण वन अधिकारियों के पास पहुंचे, तो उनके डर को खत्म करने के लिए वन्यप्राणी मुख्यालय ने 'चिंटू और मिंटू" की कॉर्टून कहानी गढ़ दी। यह कहानी चीता की सुरक्षा में ढाल साबित होने वाली है। इस कहानी में चिंटू चीता है और मिंटू गांव का एक बच्चा। जो अपनी दादी से संवाद के जरिये ग्रामीणों को बता रहा है कि चीता इंसान के लिए खतरनाक नहीं है।

कूनो पालपुर में चीता के आने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। पार्क में छह करोड़ की लागत से विशेष बाड़ा बनाया जा रहा है। जिसमें अफ्रीका से आने वाले 14 चीता (नर एवं मादा) को शुरूआती दिनों में रखा जाएगा। पार्क में तैयारियां शुरू होते ही ग्रामीणों का भी पारा चढ़ गया। उन्होंने इंटरनेट मीडिया से चीता की जानकारी निकाली और इस दहशत में आ गए कि दुनिया का सबसे तेज दौड़ने वाला और शिकार में माहिर चीता उनके और उनके मवेशियों के लिए घातक हो सकता है।


इसे लेकर विरोध शुरू होता, उससे पहले वन अधिकारी जमीनी स्थिति भांप गए और ग्रामीणों को बताया कि चीता एवं तेंदुआ में अंतर है। चीता तेज दौड़ता है और शिकार भी कुशलता से करता है, पर तेंदुए के समान दोगला (चुपके से नुकसान पहुंचाने वाला) नहीं है। अधिकारियों ने ग्रामीणों को बताया है कि अफ्रीका में सात हजार से ज्यादा चीता हैं, पर उनके द्वारा इंसान को मारने के प्रमाण नहीं हंै।

दीवारों पर चस्पा होंगे पोस्टर

विभाग हर महीने 'चिंटू और मिंटू" की कहानी का नया भाग जारी करेगा। जिसमें ग्रामीणों के नए-नए सवालों के जवाब होंगे। पोस्टरों को पार्क के आसपास स्थित गांवों में मकान और सरकारी भवनों की दीवारों पर चस्पा किया जाएगा। ताकि लोग पढ़ें और चीता को लेकर आने वाली भ्रामक सूचनाओं पर भरोसा न करें। साथ ही मैदानी वन कर्मचारी अपने-अपने प्रभार के गांवों में जाकर चीता को लेकर फैल रहे भ्रम को दूर करेंगे।

73 साल बाद आ रहा चीता

देश में 73 साल बाद चीता लौट रहा है। वर्तमान छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में वर्ष 1947 आखिरी बार चीता देखा गया था। वर्ष 1952 में भारत सरकार ने इसे विलुप्त प्राणी घोषित किया है। चीता को देश में फिर से बसाने की योजना वर्ष 2010 में बनी थी। मध्य प्रदेश सरकार ने उनके लिए कूनो पालपुर को उपर्युक्त स्थान बताया था, पर गिर के बब्बर शेरों के लिए पार्क तैयार होने के कारण एक याचिका की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी थी। वर्ष 2020 में कोर्ट ने रोक हटा दी थी। इसके बाद नवंबर 2021 में चीता लाने की तैयारी हुई।

इनका कहना है

चीता को लेकर ग्रामीणों की सोच में बदलाव लाने के लिए यह कहानी गढ़ी गई है। कहानी में यह भी बताया है कि चीता इंसान का दुश्मन नहीं है।

रजनीश सिंह, एसीएफ, वन्यप्राणी मुख्यालय