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MP की राजधानी भोपाल में ही मल-मूत्र वाला पानी पी रही बड़ी आबादी, यूनियन कार्बाइड से लगी बस्तियों में हालात खराब

यूनियन कार्बाइड कारखाने के आसपास बसी 42 बस्तियों में बसी बड़ी आबादी भी मल-मूत्र और घातक रसायन मिला पानी पीने को मजबूर है। नगर निगम ने 2017 से पाइपलाइन...और पढ़ें

By Abrar KhanEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Sun, 04 Jan 2026 09:52:56 AM (IST)Updated Date: Sun, 04 Jan 2026 09:59:26 AM (IST)
MP की राजधानी भोपाल में ही मल-मूत्र वाला पानी पी रही बड़ी आबादी, यूनियन कार्बाइड से लगी बस्तियों में हालात खराब
अटल अय्यूब नगर में सीवेज के बीच से जाती पीने के पानी की पाइप लाइन, अगर इसमें लीकेज हुआ तो मुश्किल खड़ी हो जाएगी।

HighLights

  1. गैस पीड़ित संगठनों की शिकायतों पर सर्वोच्च न्यायालय ने मई 2012 में एक निगरानी समिति का गठन किया था
  2. समिति ने हैंडपंप और कुंओं के पानी की जांच कराई तो उसमें हैवी मेटल, डाइक्लोरोइथीन जैसे रसायन मिले
  3. जिस इलाके ने 41 साल पहले गैस त्रासदी झेली थी, वहां के लोग बेरुखी से तिल तिल कर मरने को मजबूर हैं

मोहम्मद अबरार खान, भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के जिन इलाकों ने आज से 41 साल पहले गैस त्रासदी झेली थी, वे सिस्टम की बेरुखी से तिल तिल कर मरने को मजबूर हैं। कुख्यात यूनियन कार्बाइड कारखाने के आसपास बसी 42 बस्तियों में बसी बड़ी आबादी भी मल-मूत्र और घातक रसायन मिला पानी पीने को मजबूर है। यह तब है जब निगम के अधिकारी सर्वोच्च न्यायालय में बकायदा शपथपत्र देकर जल्द ही हालात सुधार लेने का वादा कर चुके हैं। इस शपथपत्र के सात वर्ष बीत जाने के बाद भी हालात नहीं सुधरे।

दरअसल गैस पीड़ित संगठनों की शिकायतों पर सर्वोच्च न्यायालय ने मई 2012 में एक निगरानी समिति का गठन किया था। इस समिति ने इन बस्तियों के हैंडपंप और कुंओं के पानी की जांच कराई तो उसमें हैवी मेटल, डाइक्लोरोइथीन जैसे रसायन मिले। समिति ने पेयजल के लिए पाइप लाइन डालने का निर्देश दिया। नगर निगम ने 2017 से पाइपलाइन से जलापूर्ति शुरू की, लेकिन यह पाइपलाइन नालियों से होकर गुजारी गई। समिति ने 2018 में इस पानी की जांच कराई तो इसमें भारी मात्रा में ई. कोलाई नाम का बैक्टिरिया पाया गया। यह मलजल में ही मिलता है।


दोबारा निरीक्षण किया

समिति ने पाया कि यह सीवेज की वजह से हो रहा है। 2018 में नगर निगम ने शपथपत्र देकर कहा कि अमृत-1 में सीवर लाइन को अलग कर देंगे। ऐसा नहीं हो पाया। अप्रैल 2025 में सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी समिति ने यूनियन कार्बाइड के आसपास की 42 कॉलोनियों का दोबारा निरीक्षण किया।

इस दौरान कई इलाकों में टैप कनेक्शन न होने, टूटी पाइप लाइनों से सीवेज मिला पानी आपूर्ति होने जैसी गंभीर शिकायतें सामने आईं। गैस पीड़ित संगठन भोपाल ग्रुप फार इंफार्मेशन एंड एक्शन की रचना ढींगरा का कहना है कि “यूनियन कार्बाइड के पीछे बसे इलाकों में आज भी लोग दूषित पानी पी रहे हैं। अमृत-1 ही नहीं अमृत-2 योजना में भी यहां कोई काम नहीं हुआ है।

जलापूर्ति और सीवेज का अमला मैदान में फाल्ट सुधारने जुटा

भोपाल शहर में नगर निगम के जलापूर्ति को लेकर सामने आ रहे फाल्ट को रोकने अपना पूरा अमला मैदान में उतार दिया है।गंदे पानी की आपूर्ति रोकने के लिए शनिवार को शहर के अलग-अलग इलाकों में पाइप लाइनों का मेंटेनेंस और सीवेज चैंबरों की सफाई का काम जारी रहा। तीन दिनों से नगर निगम की टीमें डो-टू-डोर पानी के सेंपल कलेक्ट कर रही हैं, लेकिन गंदे पानी की आपूर्ति की शिकायतें भी लगातार मिल रही हैं।

निगम के जलकार्य अमले ने करोंद के रुसल्ली इलाके में तीन जगहों पर पाइप लाइन लीकेज सुधारे जबकि करोंद में ही हाउसिंग पार्क कॉलोनी, मलिक डेयरी, नवाब कॉलोनी, नवजीवन कालोनी के साथ ही कोलार के शिर्डीपुरम में तीन लीकेज सुधारे गए। इसके अलावा अमले ने साकेत नगर स्थित अमराई परिसर में पानी की टंकी की सफाई की।

जलकार्य के अधीक्षण यंत्री उदित गर्ग ने बताया कि लीकेज सुधार का काम लगातार जारी रहेगा। जहां से भी शिकायतें मिल रहीं हैं तत्काल लीकेज सुधारे जा रहे हैं। इसके अलावा शहर में सेंपलिंग का काम चल रहा है। शनिवार को शहर में 35 से ज्यादा इलाको में डोर-टू-डोर सैंपलिंग की गई है।

इन इलाकों से लिए पानी के सैंपल

नगर निगम की टीमों ने जलापूर्ति के दौरान शहर के भीम नगर, यादव मोहल्ला, कुमार मोहल्ला, अंबेडकर नगर, कोटरा, नया बसेरा, जहांगीराबाद, प्रजापति मोहल्ला, रेलवे स्टेशन झुग्गी, वन ट्री हिल्स झुग्गी, सिंगारचोली गांव, धोबी घाट (बैरागढ़), हज हाउस, महावीर बस्ती, नई बस्ती, शिव शक्ति नगर, प्रीत नगर, उड़िया बस्ती, ब्लू मून कॉलोनी, नवाब कॉलोनी, गरीब नगर, वाजपेयी नगर, मदर इंडिया झुग्गी, हरिजन बस्ती (नारियलखेड़ा), जाटखेड़ी, अमराई, सुरेश नगर, कन्हाकुंज फेज-2, दमखेड़ा बी सेक्टर, दमखेड़ा ए सेक्टर, संजय नगर झुग्गी व आंबेडकर नगर।