
भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। राजधानी में मेट्रो प्रोजेक्ट के फेस-1 के तहत विधानसभा चुनाव तक ट्रैक की इंजीनियरिंग डिटेल तैयार की जाएगी। इसके लिए ठेका लेने वाली कंपनी दिलीप बिल्डकॉन ने साइट टेस्टिंग काम शुरू कर दिया है। साथ ही मेट्रो स्टेशन व डिपो के लिए दिसंबर के बाद नए सिरे से टेंडर किए जाएंगे। मप्र मेट्रो रेल कार्पोरेशन ने इसकी तैयारी कर ली है।
कार्पोरेशन के अधिकारियों ने बताया कि चुनाव के बाद पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड से मेट्रो स्टेशन व डिपो की डिजाइन तैयार की जाएगी। इसमें निजी कंपनी को निर्माण के एवज में स्टेशन पर कमर्शियल गतिविधि का अधिकार मिलेगा।
गौरतलब है कि भोपाल मेट्रो प्रोजेक्ट के पहले फेज में करोंद से एम्स और भदभदा से रत्नागिरी तक दो रूट तय बनाए जाएंगे। इसके तहत सुभाष नगर फाटक से एम्स तक 6.25 किमी के हिस्से पर सबसे पहले सिविल वर्क होगा। कंपनी दिसंबर तक डिटेल इंजनियरिंग डिजाइन तैयार कर जनवरी 2019 से काम शुरू करेगी। कंपनी 249 करोड़ रुपए में पिलर, स्लैब आदि का सिविल काम करेगी। साथ ही स्टेशन की डिजाइन आदि की तैयार करके देगी। यह काम ढाई साल में पूरा होगा।
2021 तक पूरे होंगे काम
दिलीप बिल्डकॉन ढाई साल में सिर्फ सिविल स्ट्रक्चर तैयार करेगी। इसके बाद स्टेशन बनाने, डिपो, ट्रैक, कोच आदि के अलग टेंडर होंगे। इन सब कामों में दो साल लगेगा। सरकार का दावा है कि यह काम 2021 तक पूरा हो जाएगा। लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो इस प्रक्रिया में लंबा समय लगेगा।
यह अड़चन अब भी बाकी
मेट्रो के लिए अभी न तो लोन मिला है न ही मेट्रोपॉलिटन एरिया नोटिफाई हुआ है। मेट्रोपॉलिटन एरिया घोषित करने व यूरोपियन इन्वेस्टमेंट बैंक से लोन लेने जैसे कई पेंच अभी बाकी हैं। इसी वजह से सरकार आचार संहिता लागू होने से पहले मेट्रो ट्रेन का भूमिपूजन कार्यक्रम नहीं कर पाई।
मेट्रो की राह में कई अतिक्रमण
एम्स के बाद अलकापुरी में 50 से ज्यादा झुग्गी बस्तियां हैं। इसके बाद हबीबगंज नाका, सरगम सिनेमा, केंद्रीय विद्यालय और सुभाष नगर के पास अतिक्रमण के दायरे में आने वाली दुकानें व गुमठियां समस्या खड़ी कर सकती हैं। हालांकि, इन्हें हटाने के लिए प्रशासन को पत्र लिखा गया है। इसके अलावा एम्स से सुभाष नगर तक सिविल एरिया में बिजली के तारों को हटाने को लेकर भी कार्पोरेशन अधिकारियों को बता चुका है। लेकिन अब तक इसे हटाने की कवायद शुरू नहीं की गई। उधर, महज एक माह के भीतर इन्हें हटाना भी प्रशासन के लिए चुनौती से कम नहीं है।
यह काम पहले ही पूरा
बीते 2 सितंबर को डिजाइन तैयार करने के लिए तकनीकी रूप से जमीन का सतही लेवल नापा गया था। इसमें कंटूर, ढाल और ऊंचाई की आधुनिक उपकरणों से नपाई की गई। दरअसल, समतलीकरण, जलभराव और पानी के बहाव को मापने के लिए ऐसी प्लानिंग की जाती है। इसके आधार पर ही सिविल वर्क के लिए डिजाइन तैयार की जाएगी।
पाइपलाइन की भी मांगी जानकारी
शहर में नगर निगम की पुरानी पाइपलाइनें भी हैं, साथ ही नई लाइनें बिछाई जा रही हैं। कार्पोरेशन ने नगर निगम से फेस-1 के तहत 5 व 2 लाइन में आने वाले क्षेत्र की पाइपलाइन की स्थिति और प्लानिंग की जानकारी मांगी है। लाइन 2 में एम्स से करोंद और लाइन 5 में भदभदा से रत्नागिरी तिराहा तक फेस-1 के तहत काम किया जाना है। अधिकारियों ने बताया कि अकसर निर्माण कार्य के दौरान यह देखा गया है कि पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो जाती है। लिहाजा, ऐसी स्थिति न बने इसके लिए पाइपलाइन की जानकारी मांगी गई है।
मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए ऐसे होगी राशि की व्यवस्था
दो रूट की लागत : 6962.92 करोड़ रुपए
भारत सरकार : 1167.33 करोड़ रुपए
राज्य सरकार : 1853.62 करोड़ रुपए
ईआईबी से लोन : 3501.97 करोड़ रुपए
पीपीपी मोड : 440 करोड़ रुपए