• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • Mutual Funds मास्टरी
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • भोपाल

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 22, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Lok Sabha Election 2024: मध्य प्रदेश में बढ़ते वोट शेयर ने भाजपा को पहुंचाया फायदा, पिछले चार लोकसभा चुनावों में ऐसा रहा है हाल

Lok Sabha Election 2024: मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव के परिणाम लोकसभा चुनाव में भी अपना असर दिखाते रहे हैं। वोट शेयर में बढ़ोतरी से हमेशा भाजपा काे ...और पढ़ें

By Bharat MandhanyaEdited By: Bharat Mandhanya
Publish Date: Fri, 22 Mar 2024 08:40:22 AM (IST)Updated Date: Fri, 22 Mar 2024 08:40:22 AM (IST)
Lok Sabha Election 2024: मध्य प्रदेश में बढ़ते वोट शेयर ने भाजपा को पहुंचाया फायदा, पिछले चार लोकसभा चुनावों में ऐसा रहा है हाल
मप्र में बढ़ती वोट शेयरिंग से भाजपा को हुआ फायदा

HighLights

  1. मध्‍य प्रदेश में तेजी से बढ़ा भाजपा का ग्राफ
  2. बढ़ते वोट शेयर से भाजपा को पहुंचा फायदा

Lok Sabha Election 2024 धनंजय प्रताप सिंह, भोपाल। लोकसभा चुनाव के ठीक पहले विधानसभा चुनाव से गुजरने वाले राज्यों में मध्य प्रदेश भी शामिल रहा है और इसके परिणाम लोकसभा चुनाव तक अपना प्रभाव भी दिखाते हैं। विधानसभा के पिछले पांच और लोकसभा के पिछले चार चुनाव का वोट शेयर भाजपा को उत्साहित करता है तो कांग्रेस के लिए चुनौती भी है।

मध्य प्रदेश में 2003 के विधानसभा चुनाव में 67.41 प्रतिशत मतदान हुआ, जिसमें भाजपा ने 173 सीटों पर जीत दर्ज कर 42.5 प्रतिशत वोट शेयर प्राप्त किया था, जबकि कांग्रेस 38 सीट के साथ 31.61 प्रतिशत वोट हासिल कर सकी थी। अगले साल 2004 में हुए लोकसभा चुनाव में 48.09 प्रतिशत मतदान हुआ, जिसमें भाजपा को 25 सीटें मिलीं और हिस्सा बढ़कर 48.13 प्रतिशत हो गया। कांग्रेस ने शेष चार सीटें जीतीं और वोट प्रतिशत बढ़कर 40.14 प्रतिशत हो गया। विधानसभा चुनाव के बाद मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी, लोकसभा चुनाव के बाद केंद्र में कांग्रेस गठबंधन की।


भाजपा का ग्राफ बढ़ा

दोनों पार्टियों के वोट शेयर में बढ़त 2008 के विधानसभा और 2009 के लोकसभा चुनाव में भी बनी रही। परिणाम में भी दोहराव था, यानी प्रदेश में भाजपा, तो केंद्र में कांग्रेस गठबंधन की सरकार। आंकड़े बताते हैं कि विधानसभा चुनाव में 69.52 प्रतिशत मतदान हुआ, जिसमें भाजपा को 143 सीटों के साथ 37.81 प्रतिशत और कांग्रेस को 71 सीटों के साथ 36.04 प्रतिशत वोट मिले थे। इसके बाद लोकसभा चुनाव में 51.16 प्रतिशत मतदान हुआ, जिसमें भाजपा को 16 सीटें, 43.45 प्रतिशत वोट शेयर मिला, वहीं 12 सीटों पर विजयी कांग्रेस ने 40.14 प्रतिशत मत प्राप्त किया, लेकिन इसके बाद कांग्रेस की सीटें और मत कम ही होता गया, जबकि भाजपा का ग्राफ बढ़ रहा है।

2013 में विधानसभा चुनाव में 72.69 प्रतिशत वोट डाले गए। भाजपा ने 165 सीटों के साथ सरकार बरकरार रखी और वोट प्रतिशत को बढ़ाते हुए 44.87 प्रतिशत पहुंचा दिया। इधर कांग्रेस की सीटें घटकर 58 रह गईं, वोट शेयर भी 36.38 प्रतिशत पर पहुंच गया। इसके अगले साल 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 27 सीटें जीतीं और वोट शेयर 54.02 प्रतिशत हासिल किया। कांग्रेस कमल नाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया की दो ही सीटें बचा सकी और वोट शेयर 34.89 प्रतिशत रह गया। मप्र में भाजपा सरकार बच गई, जबकि केंद्र में मोदी सरकार बनी।

2019 में भाजपा ने जीती 28 सीट

2018 के विधानसभा चुनाव में मध्य प्रदेश में परिणाम बदल गए और भाजपा का वोट शेयर कम हुआ, जबकि कांग्रेस को फायदा हुआ। हालांकि, 2019 में लोकसभा में बढ़त भाजपा ने ही बरकरार रखी। विधानसभा चुनाव में कुल मतदान 75.63 प्रतिशत हुआ, जिसमें 109 सीटों के साथ भाजपा को 41.02 प्रतिशत वोट मिले, जबकि कांग्रेस 114 सीटों के साथ 40.89 प्रतिशत वोट हासिल करने में कामयाब रही। अगले साल लोकसभा चुनाव 2019 में हुए तो कांग्रेस मात्र छिंदवाड़ा की सीट बचा सकी। भाजपा ने वोट प्रतिशत में बढ़त दर्ज करते हुए 58 प्रतिशत के साथ 28 सीटें जीत लीं। कांग्रेस को 34.50 प्रतिशत वोट मिले थे।

2023 में भाजपा को मिले 48.55 प्रतिशत वोट

बीते वर्ष 2023 में विधानसभा चुनाव में 77.15 प्रतिशत मतदान हुआ। भाजपा ने 163 सीटों पर जीत दर्ज कर 48.55 प्रतिशत वोट हासिल किए, जबकि कांग्रेस को 66 सीटें और 40.40 प्रतिशत वोट मिले। कांग्रेस इन आंकड़ों में बदलाव के लिए इस बार कुछ सीटों पर अलग से फोकस कर रही है, जिसमें मंडला और बालाघाट जैसी सीटें प्रमुख हैं। विधानसभा चुनाव में जिन दिग्गजों को हार का सामना करना पड़ा, उनमें से कई प्रतिष्ठा का प्रश्न मानकर लोकसभा चुनाव में भाजपा से हिसाब चुकता करने के मूड में हैं।