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MP में LPG संकट के बावजूद सुस्त पड़ी PNG की रफ्तार: इंदौर टॉप पर, राजधानी भोपाल पिछड़ी... जानें आपके शहर का हाल

LPG Cylinder Crisis in MP: एलपीजी सिलिंडर की किल्लत ने राज्य में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) के धीमे विस्तार और कम उपयोग को उजागर किया है।

By Digital DeskEdited By: Akash Sharma
Publish Date: Mon, 10 Aug 2026 02:02:07 PM (IST)Updated Date: Mon, 10 Aug 2026 02:02:07 PM (IST)
MP में LPG संकट के बावजूद सुस्त पड़ी PNG की रफ्तार: इंदौर टॉप पर, राजधानी भोपाल पिछड़ी... जानें आपके शहर का हाल
कनेक्शनों के मामले में एमपी देश में 8वें स्थान पर है (AI Generated Image)

HighLights

  1. एमपी में केवल 3.37 लाख घरेलू पीएनजी कनेक्शन हैं
  2. इंदौर-उज्जैन क्षेत्र में सर्वाधिक 1,35,095 PNG कनेक्शन
  3. राजधानी भोपाल-राजगढ़ क्षेत्र में मात्र 39,432 कनेक्शन

डिजिटल डेस्क, भोपाल: मध्य प्रदेश में हाल ही में हुए एलपीजी गैस सिलिंडर के संकट ने राज्य की कुकिंग गैस व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर कर दिया है। सिलेंडर की किल्लत और आपूर्ति बाधित होने के बावजूद, राज्य में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) को अपनाने की रफ्तार काफी सुस्त बनी हुई है। सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) योजना के तहत सालों से चल रहे काम के बावजूद, उपभोक्ता इस नेटवर्क से तेजी से नहीं जुड़ पा रहे हैं।

पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस रेगुलेटरी बोर्ड (PNGRB) के 31 मई 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में केवल 3,36,953 घरेलू पीएनजी कनेक्शन हैं। इस आंकड़े के साथ मध्य प्रदेश राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सूची में 8वें स्थान पर है।


शहरों का हाल: इंदौर सबसे आगे, राजधानी भोपाल पिछड़ी

आंकड़ों के मुताबिक, इंदौर और उज्जैन भौगोलिक क्षेत्र में सबसे ज्यादा 1,35,095 पीएनजी कनेक्शन हैं। इसके बाद ग्वालियर 66,629 कनेक्शनों के साथ दूसरे स्थान पर है। हैरानी की बात यह है कि राज्य की राजधानी भोपाल (राजगढ़ जिले के साथ) में केवल 39,432 कनेक्शन ही हो पाए हैं। एक बड़ा शहरी केंद्र होने के बावजूद भोपाल में पीएनजी अपनाने की दर काफी कम रही है।

अन्य प्रमुख क्षेत्रों का प्रदर्शन इस प्रकार है:

  • देवास: 40,503 कनेक्शन
  • सीधी-सिंगरौली: 11,993 कनेक्शन
  • रायसेन-शाजापुर-सीहोर: 11,769 कनेक्शन
  • सतना-शहडोल: 10,903 कनेक्शन

वहीं दूसरी ओर, गुना (1,813), अशोकनगर (1,806), धार (1,804), रीवा (2,830), शिवपुरी (3,126) और मुरैना (4,145) जैसे जिलों में आंकड़ा बहुत कम है। बैतूल, छिंदवाड़ा, सिवनी और बालाघाट को मिलाकर केवल 172 पीएनजी कनेक्शन ही दिए जा सके हैं।

देश के अन्य राज्यों की तुलना में मध्य प्रदेश पीछे

पीएनजी नेटवर्क के मामले में देश के अन्य राज्य मध्य प्रदेश से काफी आगे हैं। महाराष्ट्र 47.42 लाख कनेक्शनों के साथ शीर्ष पर है। गुजरात में 39.08 लाख, उत्तर प्रदेश में 23.06 लाख और दिल्ली में 19.60 लाख कनेक्शन हैं। इसके अलावा कर्नाटक (6.11 लाख), हरियाणा (6.03 लाख) और राजस्थान (5.44 लाख) भी मध्य प्रदेश (3.37 लाख) से काफी आगे हैं।

सुरक्षित और निर्बाध आपूर्ति का बेहतर विकल्प

हाल ही में पश्चिम-मध्य एशिया में उपजे तनाव के कारण एलपीजी आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई थी, जिससे प्रदेशभर में सिलिंडरों की किल्लत और पैनिक बाइंग की स्थिति बन गई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पीएनजी नेटवर्क मजबूत होता, तो इस संकट का असर काफी कम हो सकता था।

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एलपीजी की आपूर्ति बॉटलिंग प्लांट, ट्रांसपोर्टेशन और ट्रकों पर निर्भर करती है, जबकि पीएनजी सीधे भूमिगत पाइपलाइनों के जरिए घरों तक पहुंचती है। इस कारण यह आपूर्ति नेटवर्क ट्रांसपोर्ट जाम या पैनिक बाइंग जैसी समस्याओं से पूरी तरह सुरक्षित रहता है।

प्रशासन ने तेज की कवायद

सिलेंडर संकट के बाद अब राज्य सरकार सतर्क हो गई है। प्रशासनिक अधिकारियों ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि जिन इलाकों में पीएनजी पाइपलाइन नेटवर्क उपलब्ध है, वहां घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को पीएनजी कनेक्शन लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। कंपनी नेटवर्क का विस्तार तो कर रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर धीमी रफ्तार और जागरूकता की कमी के कारण लोग अब भी एलपीजी पर ही ज्यादा निर्भर हैं।