
संसदीय कार्यमंत्री डॉ.नरोत्तम मिश्रा ने किया पलटवार, बोले- तोड़कर दिखाओ, तुम्हारी सरकार तोड़ दी
Madhya Pradesh Assembly: भोपाल। नवदुनिया स्टेट ब्यूरो। विधानसभा में प्रवेश की नई व्यवस्था को लेकर सोमवार को सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्य आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे पर जमकर आरोप लगाए गए। कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक डॉ. गोविंद सिंह ने मंत्रियों और विधायकों के लिए अलग-अलग प्रवेश की व्यवस्था पर आपत्ति उठाते हुए कहा कि विधायकों का लगातार अपमान किया जा रहा है। तानाशाही की जा रही है। इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे और इस निर्णय को हम तोड़ेंगे। पलटवार करते हुए संसदीय कार्यमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि ऐसे ही चलाएंगे। तोड़कर दिखाओ। तुम्हारी सरकार तोड़ दी। इस पर शोर-शराबा इतना बढ़ा कि सदन की कार्यवाही पांच मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी।
विधानसभा में नई व्यवस्था के तहत मंत्रियों का प्रवेश अब अध्यक्ष के आने-जाने वाले द्वार से होगा। वहीं, विधायक पूर्व की तरह सांची द्वार से आएंगे। उनके वाहन मंत्रालय की तरफ मजार वाले गेट से आएंगे। इस व्यवस्था पर शून्यकाल में कांग्रेस के जीतू पटवारी ने आपत्ति उठाते हुए कहा कि पहली बार मंत्रियों और विधायकों के प्रवेश की व्यवस्था में बदलाव किया है। इसका जवाब देते हुए संसदीय कार्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष ने व्यवस्था की है। भोजन अवकाश के समय विधायकों को वाहन के लिए इंतजार करना पड़ता था।
डॉ. गोविंद सिंह ने कहा कि मैं 32 साल से विधायक हूं और लंबे समय तक मंत्री भी रहा हूं पर ऐसा भेदभाव कभी नहीं किया कि मंत्रियों और विधायकों के लिए अलग दरवाजा हो। हम निर्णय को तोड़ेंगे। विधायकों का अपमान नहीं होने देंगे। पटवारी ने भाजपा विधायकों का नाम लेकर कहा कि अब आप अयोग्य हो गए हो।
इस पर डॉ. मिश्रा ने पलटवार करते हुए कहा कि अपनी पीड़ा बताओ कि यहां (सत्ता) से वहां (विपक्ष) कैसे पहुंच गए। तुम्हारी सल्तनत को खत्म कर दिया। इस बीच सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि क्या अब तानाशाही चलाओगे। इस पर दोनों पक्षों के बीच बहस होने लगी। इसके बाद कार्यवाही पांच मिनट के लिए स्थगित कर दी गई। हालांकि, बाद में नेता प्रतिपक्ष कमल नाथ ने कहा कि विधायकों के सम्मान की परंपरा कायम रहनी चाहिए। संसदीय कार्यमंत्री ने भी कहा कि हमारी कहीं भी असहमति नहीं है। जैसे अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष मिलकर तय करें, हमारी सहमति है।