नईदुनिया प्रतिनिधि,भोपाल। मध्यप्रदेश में पहली बार कोचिंग संस्थानों की मनमानी पर व्यवस्था का अंकुश लगाया गया है। उच्च शिक्षा विभाग ने कोचिंग संस्थानों के पंजीयन और विनियमन के लिए मप्र कोचिंग केंद्र (पंजीयन एवं विनियमन) नियम, 2026 को अधिसूचित कर दिया है। अब कोचिंग संस्थानों के लिए पंजीयन अनिवार्य होगा। साथ ही शुल्क, शिक्षकों की योग्यता, विद्यार्थियों की सुरक्षा, सुविधाओं और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े प्रावधानों का पालन करना होगा।
दरअसल नई दिल्ली, कोटा, लखनऊ समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में कोचिंग संस्थानों में हुए हादसों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 2024 में केंद्र सरकार को कोचिंग संस्थानों के नियमन के लिए कानून बनाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद केंद्र ने राज्यों को नियम बनाने के निर्देश दिए थे। अब प्रदेश सरकार ने इसकी अधिसूचना जारी की है।
इस नियम के अनुसार, कोचिंग संचालकों को 90 दिन के भीतर पंजीयन के लिए आवेदन करना होगा। पंजीयन तीन साल के लिए मान्य रहेगा, जिसके बाद उसका नवीनीकरण कराना अनिवार्य होगा। पंजीयन हस्तांतरणीय नहीं होगा और एक ही संस्थान की प्रत्येक शाखा को अलग कोचिंग सेंटर माना जाएगा।
सीलिंग फैन पर प्रतिबंध
पंजीयन से पहले संबंधित क्षेत्र के अधिकारी भवन अनुज्ञा, अग्नि सुरक्षा और अन्य जरूरी मानकों की जांच करेंगे। वहीं छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हॉस्टलों में सीलिंग फैन लगाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। पंजीयन निलंबित या निरस्त होने पर संबंधित आदेश के खिलाफ 30 दिन के भीतर संभागायुक्त के समक्ष अपील की जा सकेगी।
शिक्षकों की जानकारी देना अनिवार्य
कोचिंग संस्थानों को अपनी वेबसाइट बनाकर फीस, पाठ्यक्रम, शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता, उपलब्ध सुविधाओं, संचालन के समय और शिकायत निवारण व्यवस्था की जानकारी सार्वजनिक करनी होगी। शिक्षकों के लिए न्यूनतम योग्यता स्नातक है। नैतिक अपराध में दोषी पाए गए व्यक्ति को शिक्षक के रूप में नियुक्त नहीं किया जा सकेगा।
भ्रामक दावों वाले विज्ञापनों पर भी डंडा
विद्यार्थियों और अभिभावकों को आकर्षित करने के लिए शत-प्रतिशत चयन की गारंटी जैसे भ्रामक दावों वाले विज्ञापनों पर भी रोक रहेगी। इसके अलावा जाति, धर्म, लिंग और जन्मस्थान के आधार पर प्रवेश देने या बैच निर्धारित करने में भेदभाव नहीं किया जा सकेगा।
सुरक्षा और सुविधाओं पर रहेगा जोर
नए के तहत कोचिंग परिसरों में जरूरी स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे, साफ पेयजल, प्राथमिक उपचार, पर्याप्त बैठक व्यवस्था और सुरक्षा के इंतजाम होने चाहिए। सुरक्षा व्यवस्था के साथ विद्यार्थियों की निजता का ध्यान रखना भी जरूरी होगा। यदि कोई विद्यार्थी निर्धारित अवधि से पहले कोचिंग छोड़ता है, तो नियमानुसार उसे अनुपातिक फीस वापस करनी होगी।
मानसिक स्वास्थ्य और काउंसलिंग की व्यवस्था
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान विद्यार्थियों पर पड़ने वाले मानसिक दबाव को देखते हुए नियमों में काउंसलिंग और करियर मार्गदर्शन पर भी जोर दिया गया है। संस्थानों में काउंसलर की व्यवस्था, नियमित परामर्श सत्र और अभिभावकों से संवाद को महत्व दिया गया है। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी हेल्पलाइन की जानकारी भी सार्वजनिक करनी होगी।
ऐसा होगा निगरानी तंत्र
निगरानी के लिए राज्य और जिला स्तरीय समितियां बनाई गई हैं। जिला स्तरीय समिति की अध्यक्षता कलेक्टर करेंगे। इसमें पुलिस अधीक्षक, नगर निगम आयुक्त, स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग सहित संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल होंगे। कोचिंग संस्थानों के प्रतिनिधियों को भी समिति में स्थान दिया गया है।
अभी तक कोचिंग संस्थाओं पर नियंत्रण के लिए कोई नियम नहीं था। अब नियम लागू होने से उनकी निगरानी व विद्यार्थियों की सुरक्षा आसान होगी। कोचिंग संचालक नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं, इसकी निगरानी भी होगी।- अनुपम राजन, अपर मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा विभाग