Madhya Pradesh Lok Sabha Election 2024: सौरभ सोनी, भोपाल। मध्य प्रदेश की अनुसूचित जाति और जनजाति सीटों पर कांग्रेस 20 साल में भी पार्टी का जनाधार मजबूत नहीं कर पाई है। यही वजह है की लोकसभा चुनाव में एससी और एससी के लिए सुरक्षित 10 सीटों पर 20 साल में कांग्रेस का ग्राफ घट रहा है। इनमें एससी की चार और एसटी के लिए छह सीटें सुरक्षित है।
वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस महज चार सीटें ही जीत पाई थी। हालांकि 2009 में 29 में से 12 सीटों पर कांग्रेस जीती और एसटी एससी की सीटों पर भी बढ़त बनाई, लेकिन 2014 के चुनाव में 29 में से महज दो सीटें ही कांग्रेस जीत पाई। 2019 के चुनाव में यह ग्राफ घटकर केवल एक सीट पर आ पहुंचा। कांग्रेस केवल संसदीय सीट छिंदवाड़ा ही जीती पाई थी।
मध्य प्रदेश की दो अनुसूचित जाति (एससी) की भिंड और टीकमगढ़ संसदीय सीट एवं अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए सुरक्षित खरगोन व बैतूल संसदीय सीट पिछले 20 साल से भाजपा के कब्जे में है। यहां से 2004 से 2019 तक भाजपा लगातार जीतती आ रही है।
इन 20 सालों में एक बार भी कांग्रेस यहां सेंध नहीं लगा पाई है। वहीं एससी सीट उज्जैन और देवास में केवल एक ही बार 2009 में कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। वहीं एसटी सीट मंडला, धार और शहडोल से भी कांग्रेस केवल एक ही बार 2009 में जीती है। इन सीटों पर लगातार दो बार कांग्रेस हार रही है।
मध्य प्रदेश का कांग्रेस का एक मात्र ही ऐसा बड़़ा चेहरा है जो राज्य में आदिवासी वर्ग में कांग्रेस की पहचान बनाए हुए हैं। कांतिलाल भूरिया ने रतलाम एसटी से 2004 और फिर 2009 में लगातार जीत दर्ज की थी, लेकिन नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व हुए लोकसभा चुनाव में मध्य प्रदेश के इस आदिवासी नेता का प्रभाव ही समाप्त हो गया। भूरिया 2014 और 2019 में रतलाम सीट से लगातार हार रहे हैं। इस बार पार्टी उनको टिकट देगी या नहीं इस पर भी संशय बना हुआ है।
भाजपा मध्य प्रदेश में संत रविदास यात्रा निकालकर प्रदेश के अनुसूचित जाति वर्ग को साधने का प्रयास कर चुकी है। वहीं ग्वालियर में आंबेडकर महाकुंभ का भी आयोजन किया गया था। विधानसभा चुनाव में कुछ हद तक इसके परिणाम भी देखने को मिले हैं। अब पार्टी को लोकसभा चुनाव में एसटी वर्ग के मतदाताओं से उम्मीद है कि वे भाजपा को 29 सीटों पर विजय दिलाने में कारगर साबित होंगे। इसी तरह अनुसूचित जनजाति वर्ग को साधने के लिए भी भाजपा लगातार प्रयासरत है।
लोकसभा सीट -- 2004-- 2009-- 2014-- 2019
कुल सीट-- 9 भाजपा /1 कांग्रेस-- 4 भाजपा /6 कांग्रेस-- सभी सीटों पर भाजपा-- सभी सीटों पर भाजपा
भिंड एएसी-- भाजपा-- भाजपा-- भाजपा-- भाजपा
टीकमगढ़ एएसी-- भाजपा-- भाजपा-- भाजपा-- भाजपा
उज्जैन एएसी-- भाजपा-- कांग्रेस -- भाजपा-- भाजपा
देवास एएसी-- भाजपा-- कांग्र्रेस-- भाजपा-- भाजपा
रतलाम एसटी-- कांग्रेस-- कांग्रेस-- भाजपा-- भाजपा
मंडला एसटी-- भाजपा-- कांग्रेस-- भाजपा-- भाजपा
धार एसटी-- भाजपा-- कांग्रेस-- भाजपा-- भाजपा
खरगोन एसटी-- भाजपा-- भाजपा-- भाजपा-- भाजपा
बैतूल एसटी-- भाजपा-- भाजपा-- भाजपा-- भाजपा
शहडोल एसटी-- भाजपा-- कांग्रेस-- भाजपा-- भाजपा
एक नजर में
वर्ष-- भाजपा -- कांग्रेस
2004-- 25 -- 04
2009-- 16-- 12
2014-- 27-- 02
2019-- 28-- 01
भाजपा ने वंचित वर्ग में महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाया है। पार्टी ने अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित चार में एक तो अनुसूचित जनजाति की छह में तीन सीट पर महिलाओं को उतारा है। इनमें रतलाम से अनिता नागर सिंह चौहान, धार से सावित्री ठाकुर और शहडोल से हिमाद्री सिंह को प्रत्याशी बनाया है। इसी तरह अनुसूचित जाति वर्ग के लिए सुरक्षित चार में एक संसदीय सीट भिंड से संध्या राय प्रत्याशी बनाई गई है। वे वर्तमान में इसी सीट से सांसद है।
कांग्रेस ने अनुसूचित जाति और जनजातीय समाज को वोट बैंक मानकर उनका सिर्फ शोषण किया, विकास नहीं किया। भाजपा की सरकारों ने समग्र विकास की योजनाएं बनाई और उनके महापुरूषों को उचित स्थान दिया। इन सारे सकारात्मक प्रयासों से मोदी की गारंटी की विश्वसनीयता इन वर्गों में बढ़ी है। यह चुनाव ऐतिहासिक मत प्रतिशत से भाजपा को अनुसूचित जाति एवं जनजातीय समाज दिलवाएगा। - आशीष अग्रवाल, प्रदेश मीडिया प्रभारी, मध्य प्रदेश भाजपा
विधानसभा और लोकसभा चुनाव के परिणामों में व्यापक सोच का अंतर रहता है। क्योंकि एससी एसटी वर्ग ने विभिन्न विधानसभा के चुनाव में कांग्रेस की भरपूर मदद की थी। उससे खिन्न भाजपा ने अपने कुप्रचार और ईवीएम का दुरुपयोग कर लोकसभा चुनाव के परिणामों को बदलने की पुरजोर कोशिश की यह उसी का परिणाम है। - केके मिश्रा, अध्यक्ष, मध्य प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग