
भोपाल। विधानसभा में पौधरोपण में गड़बड़ी के जबाव को लेकर निशाने पर आए वनमंत्री उमंग सिंघार जब मौका मुआयना करने जंगल पहुंचे तो वास्तविकता उनके सामने आ गई। विभाग ने बैतूल उत्तर वनमंडल की शाहपुर रेंज के 227 नंबर कंपार्टमेंट में 15 हजार 526 पौधे लगाने का दावा किया था, लेकिन मौके पर नौ हजार गड्ढे ही मिले। इनमें भी दो से ढाई हजार पौधे ही पाए गए। गड़बड़ी को गंभीरता से लेते हुए मंत्री ने पांच मैदानी कर्मचारियों को निलंबित कर दिया। वहीं तत्कालीन डीएफओ, एसडीओ और वर्तमान डीएफओ को नोटिस जारी करते हुए मुख्यालय में अटैच करने का फरमान सुना दिया।
सूत्रों के मुताबिक विधानसभा के मानसून सत्र में पौधरोपण से जुड़े सवाल फिर आने की संभावना है। इसके मद्देनजर मंत्री खुद मैदानी स्थिति का जायजा लेने उतर पड़े हैं। दरअसल, कांग्रेस विधानसभा चुनाव के पहले से तत्कालीन भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर पौधरोपण में घोटाले का आरोप लगाती आ रही है।
पार्टी ने वचन पत्र में वादा किया था कि सरकार बनने पर वह इस मामले की जांच कराएगी और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यही वजह है कि अफसरों के भरोसे न रहते हुए मंत्री वास्तविक स्थिति पता लगाने खुद जुट गए हैं। उल्लेखनीय है कि दो जुलाई 2017 को पूरे प्रदेश में अभियान चलाकर सात करोड़ से ज्यादा पौधे रोपे गए थे।
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने उठाए थे सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के एक दिन में सात करोड़ पौधे रोपने के दावों को लेकर नर्मदा परिक्रमा के दौरान सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि पौधरोपण में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा हुआ है।
कांग्रेस के सरकार में आने के बाद विधानसभा में जब पौधरोपण को लेकर सवाल हुए तो विभागीय मंत्री की हैसियत से उमंग सिंघार ने जबाव दिया था कि पौधरोपण में कोई गड़बड़ी नहीं हुई है। जांच कराई जा रही है। इसको लेकर दिग्विजय सिंह ने आपत्ति उठाते हुए कहा था कि मैंने खुद छह माह नर्मदा यात्रा की है। इस दौरान एक भी पौधा नहीं देखा। ऐसे में विभाग के मंत्री ने कैसे मान लिया कि कोई भी घोटाला नहीं हुआ। कम से कम उन्हें कांग्रेस का वचनपत्र तो पढ़ना चाहिए था।
इस पर मंत्री सिंघार ने पलटवार करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री सिंह को पत्र लिखा था कि पहले विधानसभा में दिए जबाव का अध्ययन कर लेते और मीडिया में जाने से पहले मुझ से चर्चा कर लेते तो यह स्थिति नहीं बनती। सिंघार ने सिंह को लिखा था कि उनके बेटे ने तो सिंहस्थ घोटाले को क्लीनचिट दे दी है। दरअसल, सिंहस्थ घोटाले को लेकर भी एक सवाल पूछा गया था, जिसमें नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने घोटाला नहीं होने की बात कही थी।
अफसरों ने मंत्री को अंधेरे में रखा
नर्मदा कछार में पौधरोपण मामले में वन अफसरों ने मंत्री सिंघार को लगातार अंधेरे में रखा। अफसरों ने पहले तो विधानसभा प्रश्न के जबाव में बता दिया कि पौधरोपण में कोई गड़बड़ी नहीं हुई। जिसे मंत्री ने सदन में पढ़ा और जब इस जबाव को लेकर वे घिरे तो वन मुख्यालय से एपीसीसीएफ स्तर के अफसरों को जिलों में भेजकर सेंपल जांच कराई थी। इसमें भी अफसरों ने गड़बड़ी होने से इनकार किया। इतना ही नहीं, विभाग ने एनजीटी को दिए जबाव में कहा था कि नर्मदा कछार में रोपे गए 90 फीसदी पौधे जिंदा हैं। पूरे मामले में छोटे कर्मचारियों पर ही कार्रवाई की गई है।
पांच कर्मचारी निलंबित, देर शाम जारी हुए आदेश
मामले में मंत्री ने वनक्षेत्रपाल गुलाब सिंह बरड़े, जीएस जाटव, वनपाल मूलशंकर परते, फिरोज अहमद और वनरक्षक सतीश कवड़े को निलंबित कर दिया है। देर शाम वन मुख्यालय ने निलंबन आदेश जारी कर दिए हैं। जबकि तत्कालीन डीएफओ संजीव झा, एसडीओ और वर्तमान डीएफओ राखी नंदा को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए वन मुख्यालय अटैच करने के निर्देश दिए हैं। वहीं वनरक्षक रहे ललित अटल से वसूली की जाएगी। अटल पौधरोपण के समय रेंज में वनरक्षक थे। बाद में नौकरी छोड़कर राजस्व विभाग में चले गए।