Madhya Pradesh News भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। प्रदेश में तीन साल पहले शिवराज सरकार द्वारा अवैध कॉलोनियों को वैध करने की कवायद शुरू की गई थी। अब भी सरकार वही है, लेकिन अवैध कॉलोनियां अब वैध नहीं हो पाएंगी। गुरुवार को नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसमें मप्र नगरपालिका (कॉलोनाइजर का रजिस्ट्रीकरण, निर्बंधन तथा शर्तें) नियम, 1998 में अवैध कॉलोनियों को नियमित करने के लिए किया गया संशोधन 15क विलोपित कर दिया है। मतलब अब प्रदेश की सात हजार अवैध कालोनियों के वैध होने का रास्ता ही सरकार ने बंद कर दिया है।
नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस निर्णय के बाद अवैध कॉलोनियों के कारोबारी, खरीदार या निर्माण संबंधी अनुमति देने वाले अफसर पर मामला दर्ज हो सकता है। सरकार के इस निर्णय के बाद प्रदेश के अवैध कालोनियों में रह रहे लाखों लोग प्रभावित होंगे। बता दें कि प्रदेश में कुल 7074 अवैध कालोनियों का खाका तैयार किया गया। 6536 कालोनियां नोटिफाइ की गईं। 3801 कॉलोनियों को ही वैध कर पाए।
ऐसा रहा अवैध कालोनियों को वैध करने का सफर
- 19 मई 2017 को मप्र नगरपालिका (कॉलोनाइजर का रजिस्ट्रीकरण, निर्बंधन एवं शर्तें) नियम, 1998 में संशोधन कर राज्य शासन ने अधिसूचना जारी की थी।
- नगरीय प्रशासन के निर्देश पर अवैध कॉलोनियों को चिन्हित करने का काम शुरू किया गया।
- इंदौर, भोपाल, जबलपुर व ग्वालियर में तेजी से काम शुरू हुआ।
- उच्च न्यायालय में इस प्रक्रिया को चुनौती दी गई।
- जून 2019 को उच्च न्यायालय ने कहा कि अधिनियम में नियमितीकरण शब्द जिक्र नहीं है। फिर वैध करने की कवायद रुक गई थी।
अधिनियम में संशोधन की तैयारी
बताया जा रहा है कि उपचुनावों के बाद प्रदेश में अवैध कॉलोनियों के नियमितीकरण के लिए सरकार फिर पहल करेगी। सरकार ने अफसरों के समक्ष यह मंशा जाहिर कर दी है। इसके लिए विधि विभाग से राय भी ली जा रही है। अब सरकार न्यायालयीन प्रक्रिया में नहीं जाएगी। अवैध कॉलोनियों के नियमितीकरण के लिए एक्ट में ही संशोधन की तैयारी भी पूरी की जा चुकी है।