
Madhya Pradesh News :अनुज शर्मा, भोपाल। 33 साल के विजय भोपाल में पंक्चर बनाने की छोटी सी दुकान चलाते हैं। सालभर में उन्होंने जो कमाया-बचाया था, वह बीते ढाई माह से शहर के 70 कंटेनमेंट क्षेत्रों के घरों, दुकानों, थानों, सड़कों-गलियों में सोडियम हाइपोक्लोराइड का निशुल्क छिड़काव (सैनिटाइजेशन) करने में खर्च कर दिया। प्रतिदिन केमिकल खरीदते हैं, स्प्रे मशीन के टैंक में भरकर पीठ पर लादते हैं और मोटर साइकिल से निकल पड़ते हैं अपने मिशन पर। शहर के संक्रमण प्रभावित आवासीय इलाकों में, सड़कों-गलियों में और घर-घर जाकर निश्शुल्क छिड़काव करने में पूरा दिन बीत जाता है।
भोपाल के टीला जमालपुरा के रहने वाले विजय ने बताया कि 22 मार्च को जनता कर्फ्यू के बाद लॉकडाउन में उनकी पंक्चर की दुकान बंद हो गई। काम बंद होने के बाद इस संकट में अपनी ओर से कुछ मदद करने का भाव जागा। अब सवाल यह था कि क्या ऐसा किया जाए, जिससे लोगों को तत्काल मदद मिले।
इसका जवाब जानने के लिए विजय ने स्थानीय ब्रह्माकुमारी सेवा केंद्र की संचालिका सीमा दीदी से चर्चा की, जो उनकी परिचित भी हैं। विजय के सेवाभाव को देख सीमा दीदी ने सैनिटाइजेशन कर लोगों को संक्रमण से बचाने में मदद करने का सुझाव दिया। छिड़काव के लिए टंकी, रसायन आदि सामग्री की जानकारी भी दी। इस तरह विजय ने कोरोना से लड़ने की जंग शुरू की।
विजय प्रतिदिन अलग-अलग कंटेनमेंट क्षेत्रों में जाकर पांच से छह टैंक सैनिटाइजर का छिड़काव करते हैं। इस क्रम में हर दिन करीब लंबी दूरी नापते हैं। कोई कंटेनमेंट क्षेत्र कहीं, तो कोई कहीं। बताते हैं कि 80 किलोमीटर का सफर हो जाता है। आने-जाने से लेकर छिड़काव के काम में करीब आठ घंटे का समय लग जाता है।
केमिकल खरीदने से लेकर वाहन के ईंधन तक का खर्च स्वयं वहन करते आए हैं। प्रतिदिन करीब 1000 रुपये खर्च हो जाते हैं। इस काम में विजय ने अपनी सालभर की बचत की राशि खर्च कर दी है। अपने लिए पीपीई किट भी ली है, जिसे पहनकर छिड़काव करने जाते हैं।
गरीब और बेरोजगार युवक के इस जज्बे के बारे में जिसे भी पता चलता है, वह सेवाभाव के सामने नतमस्तक हो जाता है। सोच में पड़ जाता है कि आज के दौर में भी क्या ऐसा संभव है। आज जहां लोग समाजसेवा के मद में दो रुपये खर्च करते हैं तो दूसरे दिन अखबार में फोटो छपवाने की जुगत भिड़ाने में जुट जाते हैं, वहां विजय का त्याग महान प्रेरणा के समान है, जिसने बेरोजगार होने के बावजूद अपनी साल भर की बचत परहित में खपा दी।
यही नहीं, दिन-दिन भर का श्रमदान भी बीते ढाई महीने से चुपचाप करते आ रहे हैं, बिना कोई ढिंढोरा पीटे और प्रतिफल की अभिलाषा किए बिना। उससे भी बड़ी बात यह कि अपनी जान की परवाह किए बिना वह उन इलाकों में सैनिटाइजेशन करते हैं, जहां संक्रमण फैला हुआ है।
साकेत नगर में रहने वाले विनोद सिटोके ने बताया कि विजय ने उनके घर सहित कॉलोनी के 40 घरों को सैनिटाइज किया। बकौल विनोद, विजय निस्वार्थ भाव से लोगों की सेवा कर रहे हैं, जिसका वर्णन शब्दों में कर पाना मुश्किल है।
कंटेनमेंट क्षेत्र जहांगीराबाद के रहने वाले फैज खान ने बताया कि सोशल मीडिया में किसी ने विजय के बारे में पोस्ट किया था कि वह निश्शुल्क सैनिटाइजेशन करते हैं। हमारे इलाके में संक्रमण फैला हुआ था, हमने उनसे संपर्क किया तो अगले दिन ही घर और आसपास के क्षेत्र में सैनिटाइजेशन करने आ गए। विजय छिड़काव कर कोरोना के खतरे से तो बचा ही रहे हैं। साथ ही उन्हें देखकर बीमारी से लड़ने का आत्मबल भी मिलता है।
अब अनलॉक होने पर विजय दिन में अपनी दुकान खोलने के अलावा सुबह और शाम छिड़काव करने की योजना बना रहे हैं। कहते हैं कि जीवन की गाड़ी चलाना भी जरूरी है। लिहाजा, दिन में अपनी दुकान पर पंक्चर बनाएंगे और सुबह-शाम जनसेवा करेंगे। दुकान पर आने वाले लोगों को भी कोरोना से बचाव के लिए जागरूक करते रहेंगे।
जनसेवा की जीती जागती मिसाल
विजय अय्यर जनसेवा की जीती जागती मिसाल हैं। लॉकडाउन में उनकी पंक्चर की दुकान बंद हुई तो वे अपने दोपहिया वाहन में सैनिटाइजर की टंकी बांधकर कंटेनमेंट क्षेत्रों में गली-गली मोहल्ले-मोहल्ले निकल पड़े और सैनिटाइजेशन का कार्य प्रारंभ कर दिया। उनका यह कार्य बताता है कि यदि दिल में सेवा का जज्बा हो तो कोई भी कार्य कठिन नहीं है। यदि हर नागरिक के मन में विजय अय्यर जैसी समाज सेवा की भावना आ जाए तो हम बहुत जल्दी कोरोना जैसे शत्रु को पराजित कर देंगे।
-शिवराज सिंह चौहान, मुख्यमंत्री मप्र