भोपाल। उद्योगों की महंगी बिजली से निजात दिलाने की मांग को पूरा करने के लिए सरकार परंपरागत बिजली की जगह सोलर एनर्जी का उत्पादन बढ़ाएगी। इसके लिए आठ हजार करोड़ रुपए के पांच प्रोजेक्ट पर जल्द ही काम शुरू किया जाएगा। मुरैना, सागर और छतरपुर में साढ़े तीन हजार मेगावॉट क्षमता के सोलर एनर्जी प्लांट लगेंगे। वहीं, इंदिरा सागर बांध में प्रदेश का पहला पानी में तैरता सौर ऊर्जा का प्लांट लगेगा। दो लाख सोलर पंप देने की परियोजना भी है, जिस पर तेजी से काम चल रहा है।

नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र के भविष्य को देखते हुए इसमें निवेश की संभावना के मद्देनजर मैग्निफिसेंट एमपी में एक सत्र इस विषय पर रखा गया है। उद्योग विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उद्योगपतियों की ओर से महंगी बिजली का मुद्दा लंबे समय से उठाया जा रहा है।

परंपरागत तरीके से जो बिजली बनती है वो महंगी पड़ती है, इसलिए बिजली कंपनियां ज्यादा रियायत देने की स्थिति में नहीं होती हैं। इसके विकल्प के तौर पर सौर ऊर्जा को देखा जा रहा है। प्रदेश का माहौल सौर ऊर्जा के लिए मुफीद है। इसे देखते हुए एक के बाद एक परियोजना आती जा रही हैं। रीवा में 750 मेगावॉट का बड़ा प्लांट लग चुका है।

इससे रेलवे को 400 मेगावॉट बिजली दी जा रही है। वहीं, सरकारी भवनों की इमारतों पर सोलर पैनल लगाकर बिजली खर्च को कम करने का काम किया जा रहा है। मंडीदीप में औद्योगिक इकाईयों की छत पर सोलर पैनल लगाकर बिजली बनाने का पायलट प्रोजेक्ट मंजूर हो चुका है। इसके लिए ऊर्जा विकास निगम जल्द ही टेंडर बुलाएगा। वहीं, इंदिरा सागर बांध में 200 मेगावॉट का लगभग 12 सौ करोड़ रुपए की लागत का तैरता हुआ सोलर एनर्जी प्लांट लगाने का निर्णय हो चुका है।

इसी तरह मुरैना व छतरपुर में एक-एक हजार और सागर में डेढ़ हजार मेगावॉट का प्लांट लगाया जाएगा। किसानों की बिजली खपत कम करने के लिए कमलनाथ सरकार ने सोलर पंप देने की योजना बनाई है। इसमें दो लाख किसानों को पंप दिए जाएंगे। विभाग के प्रमुख सचिव मनु श्रीवास्तव का कहना है कि प्रदेश सरकार सौर ऊर्जा की संभावनाओं पर काम रही है। सोलर एनर्जी की पांच परियोजनाएं आने वाले समय में आकार लेंगी। इससे करीब साढ़े चार हजार मेगावॉट बिजली बनेगी।

नए क्षेत्र में निवेश की तलाश

कमलनाथ सरकार प्रदेश में निवेश के लिए नए क्षेत्रों को प्रोत्साहित करने की दिशा में काम कर रही है। इसके लिए नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा के अलावा पर्यटन, लॉजिस्टिक हब और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों का बढ़ावा देने की रणनीति बनाई गई है। इन क्षेत्रों में निवेश करने पर उद्योगों को प्रोत्साहन अनुदान भी अधिक मिलेगा। वहीं, जो उद्योग जितना अधिक रोजगार देगा, उसे उतनी अधिक प्रोत्साहन सहायता दी जाएगी।

Posted By: Hemant Upadhyay