
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम श्रेणी के उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार भंडार क्रय नियम में संशोधन करने जा रही है। इसमें विभिन्न विभागों द्वारा निकाली जाने वाली निविदाओं में इन्हें प्राथमिकता मिलेगी। अनुसूचित जाति जनजाति वर्ग द्वारा संचालित उद्योगों से उत्पाद क्रय करने के प्रविधान भी रहेंगे।
बिना कोटेशन व टेंडर के विभागों को एक वित्तीय वर्ष में दस बार तक 50 हजार से एक लाख रुपये तक खरीदी का अधिकार दिया जा सकता है। वित्त विभाग भंडार क्रय नियम नए सिरे से तैयार कर रहा है। प्रयास इसे जनवरी के प्रथम सप्ताह में प्रस्तावित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआइएस) के पहले लागू करने का है।
विभागों द्वारा टेंडर की शर्तों में परिवर्तन करने को लेकर बार-बार शिकायत सामने आती थीं। स्कूल शिक्षा से लेकर कई विभागों के टेंडरों को लेकर शिकायतें सामने आ चुकी हैं। मध्य प्रदेश भंडार क्रय नियम एवं सेवा उपार्जन नियम में 2023 में संशोधन किया गया था लेकिन इसमें और सुधार की आवश्यकता महसूस की गई।
यह बात सामने आई कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग इस पर ठीक से काम नहीं कर पा रहा है। इसे देखते हुए सरकार ने प्रशासकीय व्यवस्था में परिवर्तन करके भंडार क्रय नियम वित्त विभाग को दे दिए। विभाग ने इसे नए सिरे से तैयार करने का निर्णय लिया। सूचक सूत्रों के अनुसार मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल के साथ नियम को लेकर प्रारंभिक चर्चा हो चुकी है। बैठक में सभी विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
इसमें सहमति बनी कि सूक्ष्म, लघु तथा मध्यम उद्यम के साथ स्टार्टअप को प्रोत्साहित करने वाले अधिक से अधिक प्रविधान होने चाहिए। विभाग को छोटे-छोटे कामों के लिए कोटेशन व टेंडर की प्रक्रिया से न गुजरना पड़े, इसके लिए अधिकार बढ़ाए जाएं। अभी वर्षभर में पांच बार 50 हजार रुपये तक की खरीदी विभाग सीधे बिना कोटेशन व टेंडर के कर सकते हैं। इसे 10 बार और राशि बढ़ाकर एक लाख रुपये की जा सकती है।
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वहीं, पांच लाख रुपये के काम के लिए विभागीय स्तर पर समिति बनाकर किए जा सकते हैं। सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों से विभागों को 25 प्रतिशत खरीदी करने के प्रविधान को बढ़ाया जा सकता है। अनुसूचित जाति-जनजाति के उद्यमियों और स्वसहायता समूहों से खरीदी की अनिवार्यता को यथावत रखा जाएगा। वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव मनीष रस्तोगी का कहना है कि नियम के प्रारूप पर विचार-विमर्श चल रहा है। कैबिनेट की बैठक में इन पर अंतिम निर्णय होगा।