
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। डाक विभाग की ग्रामीण डाक सेवक भर्ती में लगाई गई दसवीं की अंकसूची में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के 100 प्रतिशत अंक हासिल करने का मामला अब जांच के दायरे में है। सामने आया है कि प्रदेश में एक अभ्यर्थी ने एक ही वर्ष की दो अंकसूचियों से दो अलग-अलग जिलों में आवेदन किया।
इसमें राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआइओएस) से जारी पहली अंकसूची में उसके 98.4 प्रतिशत अंक थे। उसके तीन दिन बाद उसी बोर्ड से जारी एक और अंकसूची में उसके 100 प्रतिशत अंक दर्ज हैं। उसे नौकरी मिल गई, लेकिन गड़बड़ी सामने आने पर वर्ष 2025 में उसकी सेवा समाप्त कर दी गई।
अभ्यर्थी की पहली अंकसूची 24 अगस्त 2021 को जारी हुई, जिसमें 500 में से 492 अंक थे। वहीं, 27 अगस्त को जारी दूसरी अंकसूची में पूरे 500 अंक दर्ज थे। दोनों में नाम, माता-पिता का नाम, जन्मतिथि और पता समान, लेकिन अनुक्रमांक अलग थे।
पहली अंकसूची के आधार पर अशोकनगर जिले में चयन हुआ, लेकिन अभ्यर्थी ने नौकरी नहीं की। वर्ष 2024 में दूसरी अंकसूची के आधार पर निवाड़ी जिले में नियुक्ति मिली। दस्तावेजों में गड़बड़ी सामने आने पर वर्ष 2025 में सेवा समाप्त कर दी गई।
टीकमगढ़ के एक अन्य अभ्यर्थी के पास बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड, पटना की 23 जुलाई 2020 को जारी अंकसूची थी, जिसमें 800 में से 787 अंक दर्ज थे। इसी वर्ष उत्तराखंड के शिक्षा बोर्ड की दूसरी अंकसूची में 99 प्रतिशत अंक थे। वर्ष 2024 में ग्रामीण डाक सेवक पद पर चयनित इस अभ्यर्थी की सेवा भी गड़बड़ी सामने आने के बाद 2025 में समाप्त कर दी गई।
यह भी पढ़ें- एमपी के 260 गांवों में पानी की कमी होगी दूर... 2,388 करोड़ की परियोजना होगी शुरू; 57,422 हेक्टेयर भूमि होगी सिंचित
कुछ अभ्यर्थियों की अंकसूचियां मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल और सीबीएसई के बजाय बिहार, उत्तराखंड और एनआइओएस जैसे बोर्डों की हैं। असामान्य रूप से अधिक अंक और अलग-अलग अंकसूचियों के मामलों में सत्यापन व्यवस्था की जांच जरूरी है।
यह जांच का विषय है। नियुक्ति के दौरान दस्तावेजों का सत्यापन किया जाता है। जांच में गड़बड़ी की पुष्टि होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। - आरएस रघुवंशी, निदेशक, डाक सेवाएं, मध्य प्रदेश।